UN चीफ बोले- फॉसल फ्यूल का इस्तेमाल बंद हो:भारत ने कहा- कोयला भारत का मुख्य एनर्जी सोर्स था और रहेगा; दुबई में COP28 समिट शुरू

दुबई में 12 दिसंबर तक चलने वाली COP28 समिट शुरू हो गई है। इस दौरान संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा- ग्लोबल वॉर्मिंग कम करने के लिए कोयले और अन्य फॉसिल फ्यूल (जीवाश्म ईंधन) पर निर्भरता कम करनी होगी और धीरे-धीरे इसका इस्तेमाल पूरी तरह बंद करना होगा। क्योंकि इससे कार्बन उत्सर्जन (एमिशन) बहुत ज्यादा हो रहा है। यही वजह है कि वैश्विक तापमान लगातार बढ़ रहा है।

इस पर भारत ने कहा कि आने वाले सालों में कोयला भारत की ऊर्जा का मुख्य स्रोत बना रहेगा। विदेश मंत्रालय के सेक्रेटरी विनय मोहन क्वात्रा ने कहा- कोयला भारत का मेन एनर्जी सोर्स है और फ्यूचर में भी रहेगा। भारत ने भले ही अपनी नॉन-फॉसिल कपैसिटी 44% तक बढ़ा ली हो लेकिन अब भी लगभग 73% बिजली कोयले से ही बनती है। क्वात्रा ने ये बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दुबई यात्रा से पहले एक प्रेस ब्रीफिंग में कही।

हर साल 4000 करोड़ टन कार्बन एमिशन हो रहा
हर साल दुनिया भर से 4000 करोड़ टन कार्बन डाईऑक्साइड का उत्सर्जन (कार्बन एमिशन) होता है। इससे एयर पॉल्यूशन, ग्लोबल वॉर्मिंग यानी वैश्विक तापमान में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। इसकी वजह फॉसिल फ्यूल हैं। वैश्विक स्तर पर बिजली बनाने के लिए कोयला, क्रू़ड ऑयल और नेचुरल गैस का सबसे ज्यादा उपयोग होता है। एमिशन को कम करने के लिए कोयले पर निर्भरता कम करने की बात कही जा रही है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर मौजूदा तरीके से एमिशन होता रहा, तो 2050 तक धरती का तापमान दो डिग्री बढ़ जाएगा। ऐसा होने पर कहीं भीषण सूखा पड़ेगा तो कहीं विनाशकारी बाढ़ आएगी। ग्लेशियर पिघलेंगे, सुमद्र का जल स्तर बढ़ेगा। इससे समुद्र के किनारे बसे कई शहर पानी में डूब जाएंगे और उनका नामोनिशान मिट जाएगा।

UAE के इंडस्ट्री एंड एडवांस टेक्नोलॉजी मिनिस्टर सुल्तान अल-जबर ने COP28 उद्घाटन सत्र में कहा कि 2050 तक नेट-जीरो का लक्ष्य हासिल करना बेहद जरूरी है।
COP28 की वर्ल्ड क्लाइमेट एक्शन समिट को संबोधित करेंगे मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1 दिसंबर को दुबई में होने वाली COP28 की वर्ल्ड क्लाइमेट एक्शन समिट में शामिल होंगे। यहां संबोधन देंगे। इसके अलावा वो कुछ नेताओें के साथ द्विपक्षीय बैठक भी करेंगे।

इसमें PM मोदी के अलावा किंग चार्ल्स, ऋषि सुनक, कमल हैरिस समेत दुनियाभर के 167 नेता क्लाइमेट चेंज (जलवायु परिवर्तन) और इसके समाधान के मुद्दे पर चर्चा करेंगे। पिछले कुछ सालों में क्लाइमेट चेंज पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। इस बैठक का फोकस फॉसिल फ्यूल और कार्बन एमिशन (उत्सर्जन) पर लगाम लगाना है।

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