फिल्मी दुनिया में नाम कमाया पर रंगमंच से दूर नहीं हुए राजीव वर्मा, आलोक चटर्जी, संजय मेहता और ज्योति दुबे जैसे कलाकार
झीलों की नगरी भोपाल में रंगमंच की परंपरा भी समृद्ध है। यहां करीब सौ संस्थाएं रंगकर्म में सक्रिय हैं, जो नाटकों के निर्माण के साथ-साथ भोपाल सहित पूरे देश में नाटकों का प्रदर्शनी करती हैं। भोपाल के थियेटर की पृष्ठभूमि से निकले कई कलाकार आज टीवी, फिल्म और वेबसीरीज में काम कर अपना और शहर का नाम रोशन कर रहे हैं। विश्व रंगमंच दिवस के मौके पर नवदुनिया ने भोपाल के ऐसे बड़े कलाकारों से उनके अनुभव जाने, जिन्होंने टीवी और फिल्मों में अभिनय की ऊंचाइयों को छुआ, लेकिन थियेटर में सक्रियता कभी कम नहीं की। इसकी असल वजह रंगकर्म के प्रति उनका आदर, प्रेम और समर्पण है। उल्लेखनीय है विश्व रंगमंच दिवस प्रतिवर्ष 27 मार्च को मनाया जाता है।इसकी शुरुआत 1962 में अंतरराष्ट्रीय रंगमंच संस्थान (आइटीआइ) द्वारा की गई थी।