ताइवान में 25 साल का सबसे तेज भूकंप, तीव्रता 7.5:चार की मौत, कई जगह लैंड स्लाइड, 91 हजार घरों में बिजली नहीं; फिलीपींस-जापान तक झटके

ताइवान में बुधवार (3 अप्रैल) को 7.5 तीव्रता का भूकंप आया। इसके झटके जापान और फिलीपींस तक महसूस किए गए। ताइवान के फायर डिपार्टमेंट के मुताबिक, 4 लोगों की मौत हुई है। 50 से ज्यादा घायल हैं। आंकड़े बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

मौसम विभाग के मुताबिक भूकंप ईस्ट ताइवान के हुलिएन शहर में आया। इसका केंद्र धरती से 34 किलोमीटर नीचे था। भारतीय समय के मुताबिक सुबह 5:30 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए। कई इमारतें जमींदोज हो गईं, लैंड स्लाइड भी हुई है। कई लोगों के मलबे में दबे होने की खबर है। रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।

ताइवानी सेंट्रल वेदर ब्यूरो के मुताबिक, यह ताइवान में 25 साल में आने वाला सबसे तेज तीव्रता वाला भूकंप है। इसके पहले 1999 में 7.6 तीव्रता का भूंकप आया था। तब 2 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।

जापान-फिलीपींस ने सुनामी अलर्ट हटाया
भूकंप के बाद ताइवान, जापान और फिलीपींस ने सुनामी का अलर्ट जारी किया था। जापान के मौसम विभाग ने समुद्र में 3 मीटर यानी करीब 10 फीट तक की लहरें उठने का अनुमान जताया था। हालांकि, जापान और फिलीपींस ने अब सुनामी अलर्ट हटा दिया है।

चीन मदद भेजने को तैयार
चीनी मीडिया के मुताबिक, चीन में ताइवान मामलों पर नजर रखने वाले ऑफिस ने कहा कि वो भूकंप से हुए नुकसान से चिंतित है और ताइवान में मदद भेजने को तैयार है। चीन, ताइवान को अपना हिस्सा बताता है। वहीं, ताइवान अपने आपको स्वतंत्र कहता है।

मैप से समझिए भूकंप कहां आया ताइवान में नुकसान पर नजर…

1. 91 हजार घरों में बिजली नहीं
ताइवानी मीडिया के मुताबिक, भूकंप के बाद ताइवान के 91 हजार से ज्यादा घरों में बिजली नहीं है। भूकंप से तारों और पावर प्लांट को नुकसान पहुंचा है।

2. रेस्क्यू ऑपरेशन जारी भूकंप से सबसे ज्यादा नुकसान राजधानी ताइपे और हुलिएन शहर में हुआ।

यहां 26 इमारतों को नुकसान पहुंचा। कई इमारतों में लोग अब भी फंसे हुए हैं। कई लोग मलबे में भी दबे हैं। इन्हें बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

रेस्क्यू टीम टूटी हुई इमारतों के मलबे में दबे लोगों को बाहर निकल रही है।
ताइपे में इमारतों का मलबा हटाया जा रहा है।
3. सड़कों, धरोहरों को भी नुकसान
राजधानी ताइपे में राष्ट्रीय स्मारक और पर्यटक आकर्षण चियांग काई-शेक मेमोरियल हॉल को नुकसान पहुंचा है। परिसर में मलबा फैला हुआ है। सड़कें-पुल भी टूट गए हैं। चियांग काई-शेक मेमोरियल हॉल की है। यहां मलबा दिख रहा है। फिलहाल इसे लोगों के लिए बंद कर दिया गया है।
तस्वीर हुलिएन शहर से किंगशुई शहर जाने वाले टनल की है। यहां सड़क टूट गई है।
4. आफ्टर शॉक की तीव्रता 6.5
ताइवान में कई आफ्टरशॉक्स भी आए हैं। इनमें से सबसे तेज 6.5 तीव्रता का आफ्टर शॉक भी आया।

ताइवान की राजधानी ताइपे में भूकंप से एक पुल हिलने लगा।
ताइवान के बाहरी इलाकों में भूकंप से भूस्खलन हुआ है। तस्वीर जिउलिन इलाके की है।

जापान में हुए नुकसान पर नजर…

1. मरीजों तक नहीं पहुंच पा रहे डॉक्टर
जापान में भूकंप से कई लोगों के घायल होने की खबर है। इन लोगों को इलाज मिलना मुश्किल हो रहा है। इसकी वजह ये है कि भूकंप की वजह से ज्यादातर सड़कें टूट चुकी हैं और डॉक्टर्स प्रभावित जगहों पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। भूकंप से जापान के घरों में लगे पंखे और लाइट हिलने लगे। सोशल मीडिया पर यह फुटेज वायरल हो रहा है।
2. फ्लाइट्स कैंसल की गईं
भूकंप का सबसे ज्यादा असर जापान के ओकिनावा प्रांत में देखने को मिला। यहां आने-जाने वाली सभी फ्लाइट्स कैंसल कर दी गई हैं। ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री ने कहा कि एहतियात के तौर पर सभी फ्लाइट्स कैंसल की गई हैं। जापान के ओकिनावा प्रांत के नाहा शहर की है। यहां लोग अपने घरों से बाहर आ गए।
जापान में 1 जनवरी को 7.6 तीव्रता का भूकंप आया था
1 जनवरी 2024 को 7.6 तीव्रता का भूकंप आया था। इसके बाद यहां सुनामी आ गई थी। वाजिमा शहर में करीब 4 फीट ऊंची (1.2 मीटर) लहरें उठी थीं। हालांकि, शाम को सरकार ने सुनामी की हाईएस्ट वॉर्निंग वापस ले ली थी।

रिंग ऑफ फायर पर बसा है जापान
जापान भूकंप के लिहाजे से सेंसिटिव है। यहां भूकंप आते रहते हैं, क्योंकि ये दो टेक्टोनिक प्लेटों के जंक्शन के पास स्थित है। ओकिनावा प्रान्त, जहां भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं, महासागर के चारों ओर भूकंपीय फॉल्ट लाइनों की एक घोड़े की नाल के आकार की श्रृंखला- रिंग ऑफ फायर के करीब स्थित है।

रिंग ऑफ फायर ऐसा इलाका है जहां कॉन्टिनेंटल प्लेट्स के साथ ओशियनिक टेक्टॉनिक प्लेट्स भी मौजूद हैं। ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं तो भूकंप आता है। इनके असर से ही सुनामी आती है और वोल्केनो भी फटते हैं।

दुनिया के 90% भूकंप इसी रिंग ऑफ फायर में आते हैं। यह क्षेत्र 40 हजार किलोमीटर में फैला है। दुनिया में जितने सक्रिय ज्वालामुखी हैं, उनमें से 75% इसी क्षेत्र में हैं। 15 देश- जापान, रूस, फिलीपींस, इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड, अंटार्कटिका, कनाडा, अमेरिका, मैक्सिको, ग्वाटेमाला, कोस्टा रिका, पेरू, इक्वाडोर, चिली, बोलिविया रिंग ऑफ फायर की जद में हैं।

दुनिया में हर साल 20 हजार भूकंप आते हैं
हर साल दुनिया में कई भूकंप आते हैं, लेकिन इनकी तीव्रता कम होती है। नेशनल अर्थक्वेक इंफॉर्मेशन सेंटर हर साल करीब 20,000 भूकंप रिकॉर्ड करता है। इसमें से 100 भूकंप ऐसे होते हैं जिनसे नुकसान ज्यादा होता है। भूकंप कुछ सेकेंड या कुछ मिनट तक रहता है। अब तक के इतिहास में सबसे ज्यादा देर तक रहने वाला भूकंप 2004 में हिंद महासागर में आया था। यह भूकंप 10 मिनट तक रहा था।

तुर्किये में फिर भूकंप, 6.4 आंकी गई तीव्रता:लेबनान, इजराइल तक महसूस हुए झटके, 10 सेकंड तक कांपी धरती

तुर्किये में सोमवार को एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए। इसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6.4 आंकी गई। झटके लेबनान और इजराइल तक महसूस हुए। स्थानीय समय के अनुसार रात करीब 8.30 बजे से 10 सेकंड तक झटके महसूस किए गए। पढ़ें पूरी खबर…

इंडोनेशिया में भूकंप से 268 की मौत, कई स्कूली बच्चों ने भी जान गंवाई

इंडोनेशिया के मुख्य आईलैंड जावा में आए भूकंप से 268 लोगों की मौत हो चुकी है। 700 से ज्यादा लोग घायल हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मरने वालों में कई स्कूली बच्चे भी शामिल हैं। भूकंप में 2 हजार से ज्यादा घर तबाह हो गए। 13 हजार लोग बेघर हैं। अस्थाई कैंपों, पार्किंग और सड़कों पर ही घायलों का इलाज किया जा रहा है। पढ़ें पूरी खबर…

नेपाल में देर रात 6.3 तीव्रता का भूकंप, 6 की मौत

पड़ोसी देश नेपाल में 9 नवंबर 2023 की आधी रात 6.3 तीव्रता का भूकंप आया था। झटके भारत के दिल्ली, यूपी समेत उत्तर भारत के 5 राज्यों में भी महसूस किए गए। लोग दहशत में घरों से बाहर निकल आए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, नेपाल में भूकंप 9 नवंबर रात 1 बजकर 57 मिनट पर आया। एपिसेंटर नेपाल के मणिपुर में जमीन से 10 किमी नीचे था।

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