‘दंगाइयों ने मेरा गांव जला दिया। मेरा घर भी जल गया। सरकार ने रहने के लिए घर दिया है। ये बहुत छोटा है। इसी में हम 5 लोग रहते हैं। बारिश होती है तो पानी अंदर आ जाता है। यहां गंदगी भी बहुत है। मैं गांव में चावल की खेती करता था, अब सरकार से मिले चावल पर परिवार पल रहा है।’
इंफाल ईस्ट जिले के दोलाइथाबी गांव में रहने वाले बसंता सजीवा जेल के पास बनी अस्थायी बस्ती में रहते हैं। यहां वे लोग रहते हैं, जिनके घर मणिपुर में कुकी-मैतेई के बीच चल रही हिंसा में जला दिए गए। सरकार रिलीफ कैंपों से निकालकर लोगों को यहां बसा रही है। ऐसे ही घर हिंसा से प्रभावित दूसरे जिलों जैसे चुराचांदपुर, काकचिंग, बिष्णुपुर जिलों में बन रहे हैं।