प्रदेश में कुछ जिलों में रुक-रुककर हो रही वर्षा से गेहूँ की खड़ी फसल को संभावित क्षति से बचाने के यथा-संभव प्रयास किये जाने जरूरी हैं। प्रदेश में इस साल लगभग 58 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में गेहूँ की फसल बोयी गयी है।
यद्यपि गेहूँ की बोवाई के समय में पर्याप्त अंतर है, इसलिये कुल उत्पादन पर कम ही प्रभाव पड़ेगा। किसानों को मौसम की विपरीत परिस्थितियों के अनुसार ही कृषि कार्य अपनाने की सलाह दी जा रही है।
संचालनालय किसान-कल्याण तथा कृषि विकास द्वारा जारी एडवाइजरी के अनुसार किसान गेहूँ की फसल भली-भाँति सूखने के बाद ही कटाई करें। काटी गई फसलों को खेत में देर तक छोड़ना जोखिम भरा हो सकता है। अत: जल्दी ही फसल संकलित कर खलिहानों में सुरक्षित स्थान पर रखा जाये। इसके लिये तिरपाल या अन्य साधनों से आवश्यकता पड़ने पर वर्षा से सुरक्षा का प्रबंध करें। इसके अलावा खलिहानों को विद्युत ट्रांसफार्मर से दूर बनायें।
एडवाइजरी के अनुसार जहाँ कहीं फसल गीली हो गई हो, वहाँ छोटे-छोटे गठ्ठे बनाकर अच्छी तरह सुखाने के बाद ही गहाई करें। इन गठ्ठों को उलटते-पलटते रहें। यदि थ्रेसिंग का काम पूरा कर लिया गया हो तो अनाज का सुरक्षित भण्डारण किया जाये। इसके लिये सूखी अनाज कोठियों को अच्छी तरह साफ और कीटाणु-रहित कर लें। सलाह के अनुसार किसान कटाई या अन्य कृषि कार्यों के समय मौसम की सूचनाओं पर अवश्य ध्यान दें। इस संबंध में विभागीय माध्यमों से भी एसएमएस द्वारा सूचनाएँ किसानों को दी जा रही हैं।