प्रदेश के अशासकीय विद्यालय अब छात्रों से मनमाने तरीके से फीस नहीं ले सकेंगे। अभिभावक शिक्षण सामग्री, गणवेश आदि भी खुले बाजार से खरीदने के लिये स्वतंत्र होंगे। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर आज राज्य शासन
ने अशासकीय विद्यालयों के शुल्क निर्धारण के मार्गदर्शी निर्देश जारी कर दिये हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आज अपने निवास पर शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों की बैठक बुलाई और इस विषय पर विस्तृत विचार-विमर्श कर दिशा-निर्देश जारी करने का आदेश दिये। मार्गदर्शी दिशा-निर्देश सभी विद्यालयों को उपलब्ध करवाये जा रहे हैं।
मार्गदर्शी दिशा-निर्देशों के अनुसार अशासकीय विद्यालय पाँच वर्ष से पहले यूनिफॉर्म में बदलाव नहीं कर सकेंगे। फीस, पुस्तकें, गणवेश आदि संबंधी समस्त जानकारियाँ विद्यालय द्वारा सूचना-पटल अथवा वेबसाइट पर भी उपलब्ध करवायी जायेंगी।
ये मार्गदर्शी निर्देश मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल, केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा मंडल, आईसीएससी बोर्ड एवं अन्य अधिमान्य बोर्ड से मान्यता प्राप्त 12वीं तक के सभी अशासकीय विद्यालयों एवं शिक्षण संस्थाओं में प्रभावी होंगे।
विद्यालय में निरंतर अध्ययन करते रहने वाले विद्यार्थियों से अगली किसी कक्षा में प्रवेश पाने पर पुन: प्रवेश शुल्क नहीं लिया जायेगा। प्रवेश शुल्क की राशि एक वर्ष के शिक्षण शुल्क की राशि से अधिक नहीं होगी। यदि संस्था द्वारा शाला विकास शुल्क के नाम से राशि ली जाती है तो ऐसे शुल्क की राशि एक माह के शिक्षण शुल्क की राशि से अधिक नहीं होगी।
केपीटेशन फीस के नाम पर राशि नहीं ली जायेगी
मार्गदर्शी निर्देशों के अनुसार केपीटेशन फीस, दान या उपहार के नाम पर कोई राशि नहीं ली जायेगी। संस्था को प्रत्येक वर्ष अपने लेखों का अंकेक्षण करवाना अनिवार्य होगा। इन लेखों को सार्वजनिक रूप से सूचना-पटल पर या वेबसाइट पर प्रकाशित करना भी अनिवार्य होगा।
शुल्क का निर्धारण इस प्रकार से होना चाहिये कि वार्षिक लेखों की राशि वर्ष भर की प्राप्तियों का 10 प्रतिशत से अधिक न हो। संस्था को शैक्षणिक सत्र शुरू होने के एक महीने पहले शुल्क की विस्तृत और भुगतान के तरीके की जानकारी देना अनिवार्य होगा।