मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वयं का रोजगार शुरू करने की इच्छा रखने वाले युवाओं का आव्हान किया कि वे मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना का लाभ लेते हुए अपना काम शुरू करें। बेंक लोन वापस करने की गारंटी राज्य सरकार लेगी।
उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के युवाओं के शैक्षणिक और आर्थिक उत्थान के लिये राज्य सरकार ने कई योजना शुरू की है। उन्होंने युवाओं का आव्हान किया कि वे रोजगार माँगने वाले नहीं रोजगार देने वाले बने और अपने काम-धंधे में सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित करें। श्री चौहान आज यहाँ अपने निवास पर मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना हितग्राही पंचायत को संबोधित कर रहे थे।
श्री चौहान ने युवा स्व-रोजगारियों को मार्गदर्शन देते हुए कहा कि कड़ी मेहनत, धैर्य और उत्साह सफलता के तीन प्रमुख कारण है। युवा उद्यमियों और स्व-रोजगारियों की क्षमता और प्रतिभा की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। राज्य सरकार हर पड़ाव पर सहयोग करेगी। उन्होंने कहा कि स्व-रोजगारियों की अभूतपूर्व सफलताएँ ही मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना का उद्देश्य है। स्व-रोजगारियों को ऋण देने में सहयोगी बने बेंकों को धन्यवाद देते हुए श्री चौहान ने कहा कि 31 हजार स्व-रोजगारियों द्वारा स्थापित रोजगारों की लागत 800 करोड़ से ज्यादा है। यह सिलसिला हितग्राहियों की संख्या बढ़ने के साथ आगे बढ़ेगा।
मुख्यमंत्री ने युवाओं की शिक्षा के लिये सुविधाओं की चर्चा करते हुए कहा कि चाहे गाँव से शहरों में पढ़ने आना हो या शहरों से विदेश जाना हो सबके लिये अलग-अलग योजनाएँ हैं। स्कॉलरशिप को महँगाई के सूचकांक के साथ जोड़ा है। प्रायवेट मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लेने पर फीस सरकार द्वारा भरे जाने का प्रावधान किया गया है। संभागीय स्तर पर कमरा लेकर पढ़ने के लिये 2000 रूपये और जिला स्तर पर 1250 रुपये मासिक किराया तय किया गया है जिसे सरकार वहन करेगी।
अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री श्री ज्ञान सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री की योजनाओं ने युवाओं को नया रास्ता दिखाया है। अब पूरा परिदृश्य बदल रहा है। हितग्राही अब खुद मालिक बन रहे हैं। आदिवासी अंचलों से बड़ी संख्या में नए क्षेत्रों में रोज़गार मिल रहा है। उन्होंने जनजातीय बच्चों से योजनाओं का लाभ लेने का आग्रह किया।
प्रमुख सचिव श्री मोहम्मद सुलेमान ने योजना की विशेषताओं की जानकारी देते हुए बताया कि छह विभाग मिलकर इस योजना का संचालन अपने-अपने बजट से करते हैं। पिछले साल शुरू इस योजना में 31 हजार 600 हितग्राहियों को लाभ मिला है।