मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि एकता में अनेकता भारत की विशेषता है। श्री चौहान ने यह बात आज 10वें विश्व हिन्दी सम्मेलन में सांस्कृतिक संध्या में आए कलाकारों का स्वागत करते हुए कही। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में आए सभी बहनों, भाइयों का शब्दों और दिल की गहराइयों से स्वागत करते हैं। इस अवसर पर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल श्री केसरी नाथ त्रिपाठी, विदेश राज्य मंत्री जनरल वी.के. सिंह, कृषि मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन, संस्कृति राज्य मंत्री श्री सुरेन्द्र पटवा, मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह चौहान और सम्मेलन की प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष श्री अनिल माधव दवे भी उपस्थित थे।
सांस्कृतिक संध्या में 70 मिनट की अवधि में भारत की उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम क्षेत्र की लोक संस्कृति की मनोहारी झाँकी लोक कलाकारों ने प्रस्तुत की। लोक नृत्य के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों की जीवन शैली, कलात्मक संगीत और लय की मनोहारी प्रस्तुतियाँ प्रस्तुत की गई। गुजरात के तटीय इलाकों की जनजाति सिद्धीगोमा के कलाकारों ने (जो 700 वर्ष पूर्व अफ्रीका से आकर भारत में बस गयी थी) मंत्रमुग्ध करने वाले सिद्धी धमाल लोक-नृत्य की प्रस्तुति दी। युद्ध कला पर आधारित प्रस्तुतियाँ केरल की कलारी परराटू और पश्चिम बंगाल के पुरूलिया जिले के लोक नृत्य पुरूलिया छाऊ में महिषासुर मर्दन के पौराणिक आख्यान के माध्यम से असत्य पर सत्य की जीत को दिखलाया गया। असम के बीहू नृत्य और जम्मू-कश्मीर में रमजान माह में होने वाला रूफ नृत्य भी पेश किया गया।
अंत में विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज ने सभी अतिथियों एवं कलाकारों के सम्मान में भोज दिया। मुख्यमंत्री श्री चौहान भी भोज में शामिल हुए।
बताया गया कि ‘अथ हिन्दी कथा’ की प्रस्तुति 11 सितंबर को होगी। कथा में 200 कलाकार एक साथ प्रस्तुति देंगे।