भारतीय प्रशासनिक सेवा, वन सेवा एवं पुलिस सेवा के मंत्रालय और मुख्यालय में पदस्थ वरिष्ठ अधिकारी 25, 26 और 27 अक्टूबर को प्रदेश के गाँवों में जायेंगे। वे अवर्षा से प्रभावित किसानों और उनके परिवारों के बीच बैठकर स्थिति पर चर्चा करेंगे। साथ ही हितग्राहीमूलक योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति की भी जानकारी लेंगे। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज यहाँ सभी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिवों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए यह निर्देश दिए।
यह समय मंत्रालय में बैठने का नहीं किसानों के बीच जाने का है
श्री चौहान ने किसानों के संकट की स्थिति से अधिकारियों को अवगत करवाते हुए कहा कि यह समय मंत्रालय में बैठने का नहीं बल्कि गाँव-गाँव जाकर किसानों के बीच बैठने, उनका दु:ख-दर्द सुनने और उन्हें अधिकतम राहत देने के उपाय करने का है। उन्होंने कहा कि अवर्षा के कारण किसानों पर गहरा संकट आया है। यह समय किसानों का संकट दूर करने में अधिकारियों की प्रतिभा, क्षमता और कर्त्तव्य परायणता के प्रदर्शन करने का है। श्री चौहान ने कहा कि वे स्वयं और मंत्रीमंडल के सभी सदस्य भी गाँव-गाँव जायेंगे। श्री चौहान ने कहा कि कठिन समय में यह सकारात्मक शुरूआत है।
कम प्राथमिकता के कार्यों में होगी कटौती
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि किसानों पर आयी आपदा को देखते हुए उन्हें ज्यादा से ज्यादा लाभ पहुँचाना सर्वोच्च प्राथमिकता का काम है। उन्होंने कहा कि कम प्राथमिकता वाले कार्यों के बजट में कटौती की जाएगी।
श्री चौहान ने कहा कि 58 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसल खराब होने से राहत में करीब 3000 करोड़ और फसल बीमा की राशि में भी करीब 3000 करोड़ का खर्च आने का अनुमान है। फिलहाल 500 करोड़ का वितरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च प्राथमिकता यह है कि कोई भी प्रभावित किसान मदद से वंचित न रहे। किसानों की, जितनी ज्यादा से ज्यादा मदद होगी, की जाएगी
श्री चौहान ने कहा कि किसानों के दु:ख को देखते हुए विकास के दशक का जश्न निरस्त कर दिया गया है। जनसेवा के कार्यक्रम जारी रहेंगे। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे इस कठिन समय में अपनी प्रशासनिक क्षमता और प्रतिभा दिखायें और किसानों को मदद पहुँचाये।
मुख्यमंत्री ने सभी वरिष्ठ अधिकारियों से आग्रह किया कि वे गाँव-गाँव जाये, किसानों से बातचीत करें और योजनाओं के प्रभाव का अध्ययन कर क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं को चिन्हित कर उनका अध्ययन करें। उन्होंने कहा कि किसानों से बातचीत करने में कई मुद्दे सामने आएंगे। उन्होंने मुख्य सचिव से कहा कि सभी अधिकारियों के लिए जिलेवार भ्रमण कार्यक्रम और किसानों के लिए संचालित योजनाओं के प्रभाव का आकलन करने के लिए एक फार्मेट भी तैयार करें। उन्होंने कहा कि इस कार्य में अधिकारी अपने पूर्व अनुभव और अपनी प्रतिभा और विशेषज्ञता का उपयोग करें। उन्होंने कहा कि उद्देश्य यह है कि कैसे किसानों को ज्यादा से ज्यादा मदद पहुँचे।
दीर्घकालीन प्लानिंग करें
मुख्यमंत्री ने रबी की फसल के लिए पर्याप्त खाद और बीज की व्यवस्था की समीक्षा करने और साख सुविधा मिलने में आने वाली कठिनाइयों का आकलन करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस बात का भी अध्ययन जरूरी है कि खेती में लागत बढ़ने और वास्तविक मुनाफे में कितना अंतर है। किसानों को लागत ज्यादा लगती है और उपज का कम पैसा मिल रहा है जबकि बिचौलियों को ज्यादा फायदा हो रहा है। इसकी समीक्षा जरूरी हो गई है। जमीन पर किसान हितैषी योजनाओं की स्थिति, भूमिहीन गरीबों को मदद देने के लिए उपाय खोजना पड़ेगा। किसानों को कैसे ज्यादा से ज्यादा मदद दी जा सकती है की दीर्घकालीन प्लानिंग करना जरूरी हो गया है।
इसके अलावा विभिन्न हितग्राहीमूलक योजनाओं तथा नि:शुल्क दवा वितरण, स्वच्छता और शालाओं में बच्चों की स्थिति, आँगनवाड़ी का संचालन और उनमें बच्चों की उपस्थिति आदि विषय को भी भ्रमण के दौरान शामिल किया जाएगा। बैठक में मुख्य सचिव श्री अन्टोनी डिसा एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।