मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने केन्द्रीय मंत्रि-परिषद द्वारा आज मंजूर की गई नई फसल बीमा योजना को सही अर्थों में किसान हितैषी बताते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित होने वाले अधिक से अधिक किसानों को इस नीति से कम से कम समय में भरपूर सहायता मिल सकेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह कई वर्ष से वर्तमान में चल रही फसल बीमा योजनाओं की कमियों को दूर करते हुए उसे सही मायने में किसानों का हित साधने वाली फसल बीमा योजना लागू करने का समय-समय पर आग्रह करते रहे हैं।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश की पहल पर वर्ष 2015 के जून माह में भोपाल में फसल बीमा पर राष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न हुई थी। संगोष्ठी में भाजपा के उपाध्यक्ष और मध्यप्रदेश के प्रभारी श्री विनय सहस्त्रबुद्धे, कृषि लागत और कीमत आयोग के अध्यक्ष डॉ. अशोक विशनदास, केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के अपर सचिव श्री ए.के. श्रीवास्तव के अलावा विदेशों के कृषि विशेषज्ञ एवं बीमा कंपनियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। शिकागो से फसल बीमा विशेषज्ञ श्री जोशुआ मेडसन, अर्जेंटीना के डॉ. मिग्यूल फसको, सिंगापुर के कृषि प्रमुख एशिया पेसिफिक श्री क्रिस्टोफर कोए, जर्मनी से डॉ. लीफ हेल्मफहार्ट और स्विटजरलेंड की सुश्री हेरिनी कनान और फसल बीमा से जुड़े विषय-विशेषज्ञ एवं राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में चल रही बीमा योजनाओं से अब तक कुल 23 प्रतिशत किसानों को ही लाभ मिलता रहा है। इनकी समीक्षा कर नई बातों को शामिल करके जो नई फसल योजना बनाई गई है वह हर लिहाज से किसानों के हक में बेहतर है। नई योजना में किसानों द्वारा दी जाने वाली प्रीमियम राशि बहुत कम कर दी गई है। अब किसानों को खरीफ फसलों के लिये बीमित राशि का मात्र 2 प्रतिशत, रबी फसलों के लिये बीमित राशि के लिये 1.5 प्रतिशत और वाणिज्यिक तथा बागवानी फसलों के लिये बीमित राशि का सिर्फ 5 प्रतिशत प्रीमियम देना होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2010 से प्रभावी संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना में प्रीमियम अधिक होने से एक कैप निर्धारित रहती थी, जिससे सरकार द्वारा वहन की जाने वाली प्रीमियम राशि कम हो जाती थी। फलस्वरूप किसानों को मिलने वाली दावा राशि भी अनुपातिक रूप से घट जाती थी। नई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में 30 हजार बीमित राशि पर 22 प्रतिशत बीमांकित (एक्चुएरियल) प्रीमियम आने पर किसान मात्र 600 रुपये प्रीमियम देगा, जबकि सरकार द्वारा 6000 रुपये का प्रीमियम दिया जायेगा। शत-प्रतिशत नुकसान होने पर किसान को 30 हजार रुपये की पूरी दावा राशि प्राप्त होगी। बीमित किसान यदि प्राकृतिक आपदा के कारण बोनी नहीं कर पाता तो यह जोखिम भी इसमें शामिल है और संबंधित किसान को दावा राशि मिल सकेगी।
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि नई फसल बीमा योजना में ओला, जल भराव और लेण्ड स्लाइड जैसी आपदाओं को स्थानीय आपदा मानने का प्रावधान सर्वथा उचित है। पुरानी योजनाओं में यदि किसान के खेत में जल-भराव हो जाता था, तो किसान को मिलने वाली दावा राशि इस बात पर निर्भर करती थी कि गाँव या गाँव के समूह में नुकसानी कितनी है। इस कारण कई बार नदी-नाले के किनारे या निचले स्थल में स्थित खेतों में नुकसान के बावजूद किसानों को दावा राशि प्राप्त नहीं होती थी। नई योजना में इस विसंगति को दूर किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि फसल कटाई के बाद के नुकसान को भी बीमा योजना में शामिल कर किसानों के हित में बड़ा कदम उठाया गया है। फसल कटने के 14 दिन तक यदि फसल खेत में है और इस दौरान कोई आपदा आ जाती है तो किसानों को दावा राशि प्राप्त हो सकेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि फसल नुकसानी का आकलन करने के लिये नई फसल योजना में आधुनिक टेक्नालॉजी के उपयोग का प्रावधान किया गया है। इससे फसल कटाई/नुकसान का आकलन शीघ्र और सही-सही हो सकेगा तथा किसान को दावा राशि त्वरित रूप से मिल सकेगी। रिमोट सेन्सिंग के माध्यम से फसल कटाई प्रयोगों की संख्या कम हो जायेगी। फसल कटाई प्रयोग के आँकड़े तत्काल स्मार्ट फोन के माध्यम से अपलोड करवाये जायेंगे।