उज्जैन में अप्रैल-मई में होने वाला सिंहस्थ पवित्र धरा के 3413 हेक्टेयर क्षेत्र में होगा। यह पूरा क्षेत्र अखाड़ों से भरा होगा। इन सभी अखाड़ों में बड़ी संख्या में साधु-संत और श्रद्धालुओं की आवाजाही होगी। सिंहस्थ के दौरान भोजन सामग्री की पर्याप्त उपलब्धता एक बड़ी चुनौती होगी। इस चुनौती से निपटने के लिये जिला प्रशासन ने कार्य-योजना तैयार की है। कार्य-योजना के मुताबिक जिले के किसानों को कम समय में अधिक मुनाफा देने वाली अनाज की उन्नत किस्मों और तकनीकी जानकारियों के आधार पर सिंहस्थ में फल, सब्जी और दूध की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
उद्यानिकी की कई फसल हैं, जो गर्मी के मौसम में बाजार में आती हैं। इन सभी फसल की उन्नत किस्म लगायी जाये तो कम समय में बाजार में इनकी उपलब्धता बनी रहती है और किसान आसानी से मुनाफा ले सकते हैं। इनमें टमाटर की यू.एस.-440 और लक्ष्मी-5005 को जनवरी और फरवरी में बोने का उचित समय है, जो 45 से 50 दिन में पककर तैयार हो जाती है। इसी
तरह भिण्डी की शीतल, पूसा सावनी अर्का, अनामिका, शरबती और सम्राट आदि किस्म लगाने के 45 दिन में पक जाती हैं। जायद फलों में खरबूजा और तरबूज की बाजार में बड़ी माँग होती है। माँग को देखते हुए किसान फरवरी में शुगर बेबी, अर्का ज्योति, मधु मिलन और नामधारी तरबूज की उन्नत किस्म लगाकर 65 से 70 दिन में मुनाफा ले सकते हैं। पूसा, मधुरम, गुजरात और खरबूजा-3 खरबूजे की सबसे उन्नत किस्म है, जो 60 से 65 दिन में पककर तैयार हो जाती है।
सिंहस्थ के दौरान फूलों की भी माँग बढ़ेगी। किसान अपने खेत में गेंदा और ग्लार्डिया की उन्नत किस्म लगाकर कम समय में अधिक फूल प्राप्त कर सकते हैं। गेंदा की अफ्रीकन जाइन्ट डबल, अफ्रीका ओरेंज, अफ्रीकन येलो, गोल्डन येलो, पूसा नारंगी, पूसा बसंती, फ्रेंच गेंदा सभी उन्नत किस्में हैं। यह सभी किस्म 50 दिन में पक कर तैयार हो जाती हैं। उज्जैन और इसके आसपास के किसानों को उद्यानिकी फसलों का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
जायद की फसलों में किसी भी प्रकार की समस्या होने पर फोन नम्बर 0734-2524573 पर सम्पर्क किया जा सकता है। उज्जैन में किसानों को उनकी फसल बेचने के लिये दो तरह की डायरेक्टरी बनायी जा रही है। एक पंजीकृत किसानों की, जो प्रशिक्षण के दौरान जायद की फसल लेने पर सहमति देंगे। दूसरी अखाड़ों के महंत और साधु-संत की डायरेक्टरी बनायी जायेगी। दोनों डायरेक्टरी के उपयोग से आपसी समन्वय बेहतर तरीके से हो सकेगा।