मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज यहाँ जम्बूरी मैदान में तेंदूपत्ता संग्राहकों तथा वन समितियों के सदस्यों के राज्य स्तरीय महा-सम्मेलन में तेन्दूपत्ता संग्रहण दर 950 रूपये प्रति मानक बोरा से बढ़ाकर रूपये 1250 प्रति मानक बोरा करने की घोषणा की। श्री चौहान ने कहा कि भोपाल में वन अकादमी की स्थापना की जायेगी। इसमें वनकर्मियों, संयुक्त वन प्रबंधन और लघु वनोपज प्राथमिक सहकारी समितियों, बाँस शिल्पकारों एवं कृषकों को प्रशिक्षण दिया जायेगा। कृषकों के माध्यम से वृक्ष एवं बाँस की खेती को बढ़ावा देने के लिये राज्य की कृषि वानिकी नीति इसी वर्ष घोषित की जायेगी। उन्होंने कहा कि गरीब कल्याण वर्ष में आवासहीन गरीब परिवारों को मकान की सुविधा दी जायेगी।
श्री चौहान ने वन समितियों से वनों की रक्षा करने का आव्हान करते हुए कहा कि प्राथमिक लघु-वनोपज सहकारी समितियों के प्रबंधकों का मानदेय 5000 रूपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 6000 रूपये प्रतिमाह किया जायेगा। तेंदूपत्ता संग्राहकों को लाभ पहुँचाने के लिये दुर्घटना में मृत्यु होने पर सहायता राशि 25 हजार से बढा़कर 2 लाख रूपये कर दी जायेगी। इसमें से एक लाख सरकार की ओर से और एक लाख रूपये बीमा कंपनी की ओर से दिये जायेंगे। पूर्ण अपंगता की स्थिति में अब एक लाख रूपये मिलेंगे। संग्राहक की सामान्य मृत्यु की स्थिति में 25 हज़ार की सहायता राशि दी जायेगी।
श्री चौहान ने कहा कि इस वित्त वर्ष में काष्ठ एवं बाँस लाभांश के लिये 45 करोड़ 40 लाख के लाभांश का वितरण शुरू कर दिया गया है। वन समितियों को दिये जाने वाले काष्ठ लाभांश को 10 से बढ़ाकर 20 प्रतिशत किया जायेगा। उन्होंने कहा कि हर साल वनमण्डलवार, वृत्तवार एवं राज्य स्तर पर सबसे अच्छा कार्य करने वाली संयुक्त वन प्रबंधन समिति एवं प्राथमिक लघु-वनोपज सहकारी समिति को नगद पुरस्कार देने की योजना लागू की जायेगी। वन विकास निगम के वृक्षारोपण में भी संयुक्त वन प्रबन्ध समितियों की भागीदारी बढ़ाकर उन्हें और लाभांश दिया जायेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्य-जीवों द्वारा किसानों की फसल हानि को प्राकृतिक आपदा से हुई हानि की श्रेणी से अलग कर उसका मुआवजा राजस्व के स्थान पर अब वन विभाग द्वारा दिया जायेगा। श्री चौहान ने कहा कि वन्य जीवों से होने वाली जनहानि की क्षतिपूर्ति राशि डेढ़ लाख से बढ़ाकर 4 लाख रूपये की जायेगी। वन्य-जीवों द्वारा पालतू पशु को घायल करने पर भी मुआवजा दिया जायेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब किसी भी स्त्रोत से पौधे प्राप्त कर लगाने पर कृषकों को प्रोत्साहन राशि मिलेगी। अभी तक केवल वन विभाग की शासकीय रोपणी से पौधा खरीद कर लगाने पर ही प्रोत्साहन राशि दी जाती थी।
निजी भूमि पर रोपण के लिये प्रोत्साहन राशि को 10 रूपये प्रति पौधा से बढ़ाकर 25 रूपये प्रति पौधा किया जायेगा। इसी प्रकार वृक्षारोपण की प्रेरणा देने वाले वनदूत को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि को 4 प्रति पौधा से बढ़ाकर 7 रूपये प्रति पौधा की जायेगी। उन्होंने कहा कि निस्तारी डिपो और बाँस डिपो को विक्रय केन्द्र का दर्जा मिलेगा। इन केन्द्रों द्वारा पात्र लोगों को रियायती दर पर बाँस देने की क्षतिपूर्ति अब सरकार करेगी।
मुख्यमंत्री ने वन समितियों को तेंदूपत्ता बोनस एवं काष्ठ तथा बाँस लाभांश की राशि प्रदान की। उन्होंने लघु वनोपज संघ के नये औषधीय उत्पाद गर्भणीरक्षक बटी और वमनरक्षक बटी उत्पाद लांच किया। उन्होंने लघु वनोपज संघ की प्राथमिक वनोपज समितियों जिला यूनियन की डायरेक्ट्री का विमोचन किया। प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री नरेन्द्र कुमार ने स्वागत भाषण दिया।
वन मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार ने कहा कि वन ही जीवन है। प्राण-वायु के साथ ही वन आजीविका का भी बड़ा स्रोत है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में वन सम्पदा और सम्पत्ति पर वनवासियों का पूरा अधिकार है। शासन ने निजी भूमि पर वृक्षारोपण प्रोत्साहन की योजना प्रारंभ की है। निजी भूमि पर होने वाले वन प्रजाति के 53 वृक्षों को ट्राजिट पास से मुक्त किया गया है। इससे निजी भूमि पर होने वाले वृक्षों के विक्रय में अब दिक्कत नहीं आयेगी।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री गोपाल भार्गव ने कहा कि प्रदेश में लगभग 32 लाख तेंदूपत्ता से ग्राहक और 20 लाख बीड़ी श्रमिकों के आजीविका का प्रमुख स्त्रोत वन और उसके उत्पाद है। उन्होंने वन उत्पादों की गुणवत्ता और उनके प्र-संस्करण को और अधिक बेहतर बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि उच्च गुणवत्ता के उत्पाद की अधिक कीमत मिलने से संग्राहक और श्रमिकों की आय में वृद्धि होगी।
कृषि मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन ने कृषि और वन विभाग के संयुक्त संवर्धन प्रयासों पर बल दिया। उन्होंने बताया कि वनों के सूखे पत्तों से जैविक खाद बनाने और वन्य-प्राणियों से फसल को बचाने के लिये परियोजना बनाई जा रही है। सांसद एवं भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष श्री नंदकुमार सिंह चौहान ने कहा कि प्रदेश सरकार ने वन सुरक्षा समितियों को मजबूत बनाने के प्रभावी कार्य किये हैं। उन्होंने कहा कि वनवासी वनों के पालक है। उनका संरक्षण-संवर्धन वनों के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण है।