उज्जैन में सिंहस्थ के दौरान अग्नि दुर्घटनाओं को रोकने के लिये विशेष प्रबंध किये गये हैं। विभिन्न जिलों एवं विभागों से 81 फायर ब्रिगेड वाहन मय आधुनिक संसाधनों के साथ उज्जैन में तैनात किये गये हैं। अग्निशमन सेवा से जुड़े अमले को सिंहस्थ के दौरान विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिये गये हैं।
सिंहस्थ में आये साधु-संतों द्वारा बनाये गये पंडालों, दुकानों, घास-फूस की कुटीरों, हवन और अन्न क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जायेगा।। अग्नि दुर्घटनाओं से निपटने के लिये फायर प्लान तैयार किया गया है। प्लान के अनुसार मेला क्षेत्र में 16 अस्थायी और एक स्थायी फायर स्टेशन, 21 फायर वाहन प्वाइंट और 9 मोटर साइकिल विथ वॉटर मिस्ड सिस्टम बनाये गये हैं। इन सबके लिये 1200 जवान और कर्मचारियों को भोपाल में 15-15 दिन का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। अग्निशमन दल की पहली
प्राथमिकता होगी कि सिंहस्थ के दौरान आगजनी की घटना न हो। इसके लिये फायर आर्डर बनाया गया है। फायर आर्डर में विभिन्न स्तर के अधिकारियों को अलग-अलग दायित्व सौंपे गये हैं। भू-खण्ड आवंटन के समय भी फायर आर्डर की प्रति दी गई है। पंडालों में अग्निशमन के लिये पर्याप्त मात्रा में पानी रखने के लिये कहा गया है। पंडालों में गैसबत्ती और चिमनियों का उपयोग न करने की समझाईश दी गई है। अग्नि सुरक्षा से संबंधित 10 लाख पेम्फलेट्स जन-सामान्य में वितरित किये गये हैं।
प्रकाश व्यवस्था प्रबंधन के लिये 75 लाईनमेन और 150 हेल्पर
मेला क्षेत्र में प्रकाश व्यवस्था की प्रबंधन योजना तैयार की गई है। योजना में मेला क्षेत्र में 75 लाइनमेन तथा 150 हेल्पर तैनात किये गये हैं। विद्युत वितरण कम्पनी का हर जोन में एक कार्यालय होगा। प्रत्येक जोन में एक हाईड्रोलिक वाहन भी रहेगा। मेला क्षेत्र में 7,500 विद्युत खम्बे स्थापित किये गये हैं। खम्बों पर एलईडी लाइट लगायी गयी है। पीडब्ल्यूडी ने क्षिप्रा घाटों पर 300 खम्बे स्थापित किये हैं। हर खम्बे पर 4 फ्लड लाइट लगायी गयी हैं। लाइटों के संधारण के लिये 81 लाइनमेन और 162 कर्मचारी तैनात किये गये हैं। घाटों पर 16 हाईमास्ट पोल भी लगाये गये हैं। हाईमास्ट पर निरंतर बिजली सप्लाई सुनिश्चित करने के लिये जनरेटर भी लगाये गये हैं। नगर निगम मेला क्षेत्र और उज्जैन शहर में डेकोरेटिव लाइट भी लगा रहा है।