राजस्व, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता ने कहा कि जो संस्थान जिस कार्य के लिए बनाए गए हैं, वह कार्य योजनाबद्ध तरीके से करें। उन्होंने कहा कि सिर्फ फंडिंग एजेंसी नहीं बनें। श्री गुप्ता ने आज विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की समीक्षा की।
श्री गुप्ता ने कहा कि यह भी देखें कि रिसर्च किसके लिए की जा रही है। रिसर्च का फायदा प्रदेश को मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि ट्रेनिंग और वर्कशॉप का भी आडिट होना चाहिए। एक ही तरह का कार्य अलग-अलग संस्थाओं द्वारा नहीं किया जाना चाहिए।
श्री गुप्ता ने कहा कि क्षेत्रवार गतिविधियों का सर्वें कर योजना बनायें। उन्होंने कहा कि जिलों के रिसोर्स एटलस का विमोचन संबंधित जिले में करवायें। एटलस पर्याप्त संख्या में जिलों में उपलब्ध भी होना चाहिए। श्री गुप्ता ने कहा कि मेपिंग के बाद उसका उपयोग भी करें। इसमें संबंधित विभाग की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाय।
मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् के महानिदेशक प्रो. प्रमोद कुमार वर्मा ने परिषद् की गतिविधियों की जानकारी दी।
जन्म प्रमाण-पत्र के साथ ही बच्चे को आधार से भी जोड़ें
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने कहा कि बच्चों के जन्म प्रमाण-पत्र बनाने के साथ ही आधार में भी पंजीकृत करें। उन्होंने स्वॉन, स्टेट डाटा सेंटर, कॉमन सर्विस सेंटर सहित अन्य शाखाओं का निरीक्षण कर कार्य-प्रणाली की जानकारी ली। एम.पी. स्टेट इलेक्ट्रॉनिक डेव्हलपमेंट कार्पोरेशन के एम.डी. श्री एम.सेलवेन्द्रन ने कार्पोरेशन और मेप आई-टी की योजनाओं और प्रोजेक्ट की जानकारी दी।
बैठक में सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी श्री मनीष रस्तोगी, एम.पी.एस.ई.डी.सी. के प्रोजेक्ट डायरेक्टर श्री भास्कर लाक्षाकार उपस्थित थे।