यूपी के लिए जारी एग्जिट पोल्स में भाजपा को सबसे बड़ी पार्टी बताया गया है, वहीं सपा और कांग्रेस का गठबंधन दूसरे नंबर पर रहा है। सपा की बेचैनी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मौजूदा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपनी राजनीतिक विरोधी मायावती से हाथ मिलने के संकेत भी दे दिए हैं।
बहरहाल, शुक्रवार को सपा नेता रामगोपाल यादव ने नया आरोप लगाया। उनका कहना है कि ये एग्जिट पोल्स सही नहीं हैं। चैनलों ने दबाव में आकर एग्जिट पोल्स बदले हैं। उनके पास इससे जुड़ी जानकारी है।
इस प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के श्रीकांत शर्मा ने सवाल उठाया, जब सपा, कांग्रेस से गठबंधन कर रही थी, तब चुप रहने के लिए रामगोपाल जी पर कैसा दबाव था? अब अखिलेश ने बसपा से हाथ मिलाने के संकेत दिए तब भी वे किस दबाव में चुप हैं?
वहीं भाजपा नेता मुख्तार नकवी ने सपा और बसपा के साथ आने की अटकलों पर निशाना साधा है। उनका कहना है- जो लोग जुगाड़ की सरकार के सपने देख रहे हैं, वे सपने ही देखते रह जाएंगे। वहीं भाजपा के उत्तरप्रदेश प्रभारपी ओम माथुर का दावा है कि भाजपा दो तिहाई बहुमत से सरकार बनाने जा रही है।
चुनाव बाद के एक्जिट पोल की मानें तो भाजपा कई राज्यों में अपना परचम लहराने जा रही है। पांच राज्यों में से उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गोवा में भाजपा की सरकार बनने के साफ संकेत हैं।
वहीं मणिपुर में कांग्रेस के साथ इसकी टक्कर है। अगर कांग्रेस मणिपुर के साथ-साथ पंजाब भी गंवाती है, तो फिर यह पूरी तरह से कांग्रेस मुक्त चुनाव साबित हो सकता है। हां, पंजाब हारने का यह अर्थ होगा कि आम आदमी पार्टी के सामने कांग्रेस पस्त है।
अगर यह आकलन पूरी तरह सही साबित हुआ, तो कहा जा सकता है कि भाजपा कम-से-कम 75 फीसद अंक के साथ पास होगी, क्योंकि पंजाब में भाजपा अकाली दल की छोटी सहयोगी के रूप में मैदान में थी।
गुरुवार को जितने भी एक्जिट पोल सामने आए उनमें एक समानता थी। चार राज्यों में भाजपा ही बहुमत की पार्टी थी या फिर सबसे बड़ी पार्टी। सबसे अहम राज्य उत्तर प्रदेश में कुछ पोल में तो भाजपा के लिए पूर्ण बहुमत से लेकर आंधी तक दिखाया गया है। वहीं कुछ एक्जिट पोल में त्रिशंकु विधानसभा की आशंका भी जताई गई है।
लेकिन, उस दशा में भी भाजपा बहुमत के आंकड़े 202 से बहुत दूर नहीं है। यानी यह स्पष्ट दिखा कि सरकार बनाने का दावा करने और सरकार गठन के लिए राज्यपाल की ओर से आमंत्रण पाने का पहला हक भाजपा के पास होगा।
गोवा में सत्ता बरकरार रखना और उत्तराखंड में अंदरूनी बगावत के बावजूद बहुमत से सत्ता हासिल करना भाजपा के भविष्य के मंसूबों को बल देगा। मोदी सरकार को पूर्ण बहुमत दिलाने में 73 सांसदों के साथ उत्तर प्रदेश का अहम योगदान था। तीन साल बाद फिर से विश्वास जताने का स्पष्ट अर्थ होगा कि प्रदेश की जनता अभी भाजपा को ही बदलाव का साधन मानती है।
उत्तराखंड में कांग्रेस भाजपा के हाथों सत्ता गंवाती दिख रही है। मणिपुर में भी अगर यही हुआ तो कांग्रेस सीधे तौर पर दो और राज्य गंवा देगी। पंजाब में कांग्रेस के लिए एकमात्र आशा की किरण दिख रही है। कुछ पोल में कांग्रेस की सरकार बनती दिखाई गई है, तो कुछ में आप की सरकार।
इन दोनों की लड़ाई में 10 साल से सत्ता पर काबिज अकाली दल और भाजपा की जोड़ी हाशिये पर खड़ी दिख रही है। अगर आम आदमी पार्टी हावी रही तो फिर यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि तीसरी ताकत की मौजूदगी में कांग्रेस अपना पैर नहीं जमा पाती है।
अगर आप पंजाब हासिल करने में असफल होती है, तो यह उसके लिए बड़ी निराशा होगी, क्योंकि दिल्ली के बाद पहली बार गोवा और पंजाब में इसने खुद को आजमाया है। पोल में गोवा में आप को काफी नीचे दिखाया गया है। लेकिन पंजाब में वह एक ताकत के रूप में उभरेगी