मप्र भोपाल और ग्वालियर की सेंट्रल जेल में तीन पाकिस्तानी जासूस

पाकिस्तान में जासूसी करने के झूठे आरोप में पकड़े गए भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को जहां मौत की सजा सुनाई गई, वहीं मप्र में भी तीन पाकिस्तानी जासूस हैं। एक पिछले साल रिहा होने के बाद आज भी पुलिस का मेहमान है तो दो भोपाल और ग्वालियर की सेंट्रल जेल में बंद है।
हालांकि वे यहां निर्भीक होकर रहते हैं। इनमें से एक पाकिस्तानी जासूस तो दो साल बाद रिहा हो रहा है। दोनों पाकिस्तानियों के साथ न तो जेल में कभी मारपीट हुई, न ही किसी तरह का भेदभाव।
10 महीने से मुनीर का खर्चा उठा रही है पुलिस
आईएसआईएस के लिए भोपाल के आर्मी बेस की जासूसी करने के आरोप में 12 साल भोपाल सेंट्रल जेल में रहकर पिछले साल पांच मई को रिहा हुआ साजिद मुनीर आज भी भोपाल पुलिस का मेहमान बना हुआ है। मुनीर को 2004 में गिरफ्तार किया गया था।
साजिद को पाकिस्तान भेजने के कई प्रयास किए गए, लेकिन पाकिस्तान सरकार उसे स्वीकार नहीं कर रही। स्थिति यह है कि जिला स्पेशल ब्रांच उसकी 10 महीने से उसकी खास देखरेख कर रही है। उसके कपड़ों से लेकर रहने खाने पीने का सारा खर्चा भी उठा रही है।
डर था हश्र कही पाकिस्तान की जेलों जैसा न हो
जासूसी करने के मामले में राजधानी के मंगलवारा क्षेत्र से वर्ष 2008 में कराची पाकिस्तान का निवासी इमरान वारसी कुरैशी भी पकड़ा गया था। चार साल तक उस पर मुकदमा चला और वर्ष 8 अप्रैल 2013 को उसे दस साल की सजा सुनाई गई। इसमें से आठ साल की सजा पूरी हो चुकी है उसे 2019 में रिहा कर दिया जाएगा।
इमरान ने जेल में अपने कई दोस्त भी बना लिए हैं और उसे खुशी है कि यहां कभी भी उसके साथ कोई बुरा बर्ताव नहीं किया गया। जबकि जब उसे जेल भेजा गया था तो उसे भी लग रहा था कि कही उसका हश्र भी पाकिस्तान की जेल में आने वाले भारतीयों जैसा न किया जाए।
जो नफरत फैलाई जाती है वो गलत है..
पाकिस्तान के पंजाब में रहने वाले अब्बास अली खान को भी जासूसी मामले और आपराधिक षड्यंत्र रचने के आरोप में वर्ष 2006 में ग्वालियर से पकड़ा गया था। आरोप साबित होने पर कोर्ट ने उसे 14 साल की सजा सुनाई।
जेल में अब्बास ने कई दोस्त बना रखे हैं और वो कहता है कि पाकिस्तान जाकर बताएगा कि भारत को लेकर जो नफरत फैलाई जाती है, वो कितनी गलत है।
दो जेल में बंद हैं
मुनीर के पिछले साल छूटने के बाद भी दो पाकिस्तानी जासूस भोपाल व ग्वालियर की सेंट्रल जेल में बंद हैं। किसी के साथ आज तक न कोई मारपीट हुई न किसी तरह का भेदभाव।

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