हिंदी को देश और भोजपुरी को अपना घर मानने वाले एक कवि जिन्होंने अपने गांव में कभी हिंदी नहीं बोली लेकिन फिर भी हिंदी को अपना देश कहा, माना और जीया भी। एक कवि जो अपने आत्म परिचय में कहते हैं, ‘कविता, संगीत और अकेलापन, ये तीन चीजें मुझे बेहद प्रिय हैं।
वो अक्सर कहते थे मैं जाता हर जगह हूं लेकिन मेरा मन सिर्फ गांव जाने का होता है।
ये थे तीसरे तार सप्तक के कवि केदारनाथ सिंह। ‘अभी बिल्कुल अभी’ उनका पहला काव्य संग्रह था, जिसके 20 साल बाद उनका दूसरा काव्य संग्रह ‘जमीन पक रही है’ आया। पहले काव्य संग्रह ने उन्हें पूरी तरह एक नये कवि के रूप में स्थापित कर दिया। एक ऐसे कवि जिनकी कविता में कोई ठहराव नहीं है और न ही कोई छिपाव है। वे अपनी कविताओं में किसी बनी बनाई लकीर पर नहीं चलते बल्कि नया रास्ता बनाते चलते हैं।