वित्त मंत्री अरूण जेटली ने बैंकों और वित्तीय संस्थाओं से कहा है कि वे अर्थव्यवस्था को उचित दिशा में ले जाने के लिए मिलकर काम करें। नई दिल्ली में बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ बजट पूर्व विचार विमर्श में उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था की धीमी विकास दर और उच्च मुद्रास्फीति के दबाव के कारण आर्थिक गतिविधियों के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। बैठक में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की पूंजी बढ़ाने, इन बैंकों में सरकारी स्वामित्व कम करके ५१ प्रतिशत करने और बैंकों के डूबे कर्ज की समस्या से निपटने के लिए राष्ट्रीय परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी स्थापित करने का सुझाव दिया गया। इनके अलावा कृषि क्षेत्र के लिए ब्याजमुक्त ऋण की योजना जारी रखने, स्वास्थ्य बीमा के लिए कर-लाभ की सीमा बढ़ाने और आयकर कानून के तहत कर छूट की सीमा बढ़ाने के सुझाव भी दिए गए। नए कंपनी विधेयक के विभिन्न प्रावधानों पर फिर से विचार करने का मुद्दा भी उठाया गया। श्री जेटली ने आश्वासन दिया कि बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों द्वारा दिए गए सुझावों पर विचार किया जायेगा।