विद्यार्थियों में विज्ञान और गणित के प्रति रुझान बढ़ाने के लिये राष्ट्रीय आविष्कार अभियान शुरू किया जायेगा। राष्ट्रीय नवाचार काउन्सिल गठित की जायेगी जो विज्ञान को बाजार से जोड़ेगी।
मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान से चर्चा के दौरान केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी ने आज यहाँ यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने के बाद पाँचवीं तथा आठवीं की बोर्ड परीक्षा समाप्त कर दी गयी है, इससे शिक्षा की गुणवत्ता पर असर हुआ है। इसे ध्यान में रखते हुए शिक्षा के मूल्यांकन की कोई पद्धति पुन: शुरू की जानी चाहिये। उन्होंने शिक्षा विकास, गुणवत्ता वृद्धि के लिये प्रदेश से केंद्र सरकार को भेजे गये प्रस्तावों की जानकारी दी। इस दौरान उच्च शिक्षा मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री पारस जैन, स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री श्री दीपक जोशी और मुख्य सचिव श्री अन्टोनी डिसा भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में शिक्षा के अधिकार कानून के प्रावधान के तहत निजी स्कूलों में सवा चार लाख गरीब बच्चों को भर्ती करवाया गया है। इन बच्चों की फीस के लिये राज्य सरकार ने 300 करोड़ रूपये व्यय किये हैं। इस राशि में केंद्र सरकार की भागीदारी भी होना चाहिये। इसके साथ ही बराबरी की भावना जाग्रत करने के लिये इस प्रावधान के तहत निजी स्कूलों में जा रहे गरीब परिवार के बच्चों के गणवेश, पाठ्य-पुस्तकों तथा अन्य खर्चों की राशि भी दी जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि ग्रामीण स्कूलों में वाचनालय के अभाव को देखते हुए केन्द्र को 1,253 हायर सेकेण्डरी स्कूल में वाचनालय खोलने के लिये 150 करोड़ रूपये का प्रस्ताव भेजा गया है। मध्यप्रदेश जैसे बड़े क्षेत्रफल और भौगोलिक दृष्टि से फैले राज्य के दूर-दूर बसे गाँवों में बेटियों की शिक्षा के लिये नयी हाई स्कूलों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है। राज्य शासन ने केंद्र को 6000 नये हाई स्कूल शुरू करने के लिये प्रस्ताव भेजा है। स्कूलों में प्रयोग शालाओं की कमी को देखते हुए 930 स्कूल में प्रयोग शाला के लिये 88 करोड़ रूपये का प्रस्ताव केंद्र को भेजा है।