मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान कल गुरुवार को समन्वय भवन में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के ममता अभियान के द्वितीय चरण का शुभारंभ करेंगे। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा, स्वास्थ्य राज्य मंत्री श्री शरद जैन तथा प्रख्यात सिने तारिका सुश्री माधुरी दीक्षित विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।
मध्यप्रदेश में पिछले वर्षों में शासन की ओर से अनेक जन-हितैषी योजनाएँ प्रारंभ की गई हैं। इन्हें राष्ट्रीय-स्तर पर मान्यता प्राप्त हुई है। अनेक राज्य में उन्हें उपयोगी पाकर लागू किया जा रहा है। मातृ मृत्यु दर एवं शिशु मृत्यु दर कम करने के लिये संस्थागत प्रसव को बढ़ावा, एस.एन.सी.यू. का निर्माण, जननी एक्सप्रेस योजना, दुर्घटना ग्रसित अथवा बीमारों को अस्पताल पहुँचाने के लिये संजीवनी 108, कुपोषण दूर करने के लिये एन.आर.सी. की स्थापना आदि प्रमुख कार्य हैं। मातृ मृत्यु दर एवं शिशु मृत्यु दर जैसे स्वास्थ्य सूचकांकों में मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय औसत से भी अधिक गिरावट दर्ज की गई है। शासन ने आगामी दो वर्ष में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में विशेष रणनीतिगत प्रयास करने का संकल्प लिया है। सभी स्वास्थ्य केन्द्र में मरीजों को ओ.पी.डी. अथवा भर्ती होने पर नि:शुल्क जाँच, नि:शुल्क समस्त औषधियों तथा नि:शुल्क पौष्टिक आहार की व्यवस्था की गई है। इन सुविधाओं का लाभ प्रतिदिन लाखों लोग ले रहे हैं। प्रदेश में 1412 प्रसव केन्द्र को क्रियाशील किया गया है, जिनके माध्यम से सुरक्षित प्रसव सेवाएँ दी जा रही हैं। ग्राम-स्तर पर प्रभावी हस्तक्षेप के लिये राज्य में 49 हजार 970 ग्राम आरोग्य केन्द्र स्थापित किये गये हैं, जिन्हें और सुदृढ़ किया जा रहा है। इन प्रयासों से जहाँ प्रदेश में मातृ मृत्यु दर 310 प्रति एक लाख जन्म से घटकर 227 प्रति एक लाख जन्म, शिशु मृत्यु दर 63 प्रति हजार जीवित जन्म से घटकर 56 प्रति हजार तथा सकल प्रजनन दर 3.1 से घटकर 2.9 पर आ गई है। प्रदेश में मातृ मृत्यु दर 225 प्रति लाख जन्म, शिशु मृत्यु दर 30 प्रति हजार जीवित जन्म तथा सकल प्रजनन दर 2.6 करने का लक्ष्य किया गया है।