बघेली संस्कृति-साहित्य को संरक्षित एवं संवर्धित करने की आवश्यकता है। तभी हम अपनी विरासत से आने वाली पीढ़ी को अवगत करवा सकने में सक्षम होंगे। यह बात जनसम्पर्क, ऊर्जा एवं खनिज मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा
में दो दिवसीय विन्ध्य महोत्सव का शुभारंभ करते हुए कही।
श्री शुक्ल ने कहा कि हमारी समृद्धशाली विरासत है जिसे सहेजना होगा। उन्होंने कहा कि विकास के विभिन्न आयाम जैसे सड़क निर्माण, कृषि उत्पादन के साथ बघेली संस्कृति, साहित्य, पर्यटन आदि को भी समन्वित करना होगा, तभी रीवा की विशिष्टताओं को देश के नक्शे पर उकेरने में सफलता मिलेगी।श्री शुक्ल ने कहा कि महोत्सव के आयोजन के साथ ही सांस्कृतिक और साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ाने के सभी प्रयास किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि रीवा से जुड़े विभिन्न विधाओं के महान व्यक्तियों के कार्यों को सहेजने के भी प्रयास होंगे। जनसम्पर्क मंत्री ने कहा कि रीवा में महान कलाकार स्व. श्री राजकपूर के नाम से विश्व-स्तरीय ऑडिटोरियम बनाया जायेगा। श्री राजकपूर का रीवा से काफी पुराना नाता था। श्री शुक्ल ने बघेली रचनाधर्मिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिये रचनाकारों को शाल, श्रीफल, सम्मान-निधि, सम्मान-पत्र और प्रतीक-चिन्ह देकर सम्मानित किया। श्री गोपाल शरण तिवारी-रीवा, डॉ. लहरी सिंह-सीधी, श्री दयाराम गुप्ता-ब्यौहारी, रामनारायण सिंह राना-सतना, कैलाशचन्द्र सक्सेना-रीवा एवं विश्वनाथ पाण्डेय-रीवा को सम्मानित किया गया। जनसम्पर्क मंत्री ने डा. हाकिम सिंह द्वारा लिखित पुस्तक ‘म्याछा उखार ल्याब’ एवं श्री बनर्जी की पुस्तक ‘खोंथइला’ का विमोचन किया। उन्होंने बघेली रचनाकारों की पुस्तक प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।