किसान-कल्याण तथा कृषि विकास संचालनालय, मध्यप्रदेश ने मौसम विभाग से प्राप्त सूचना के आधार पर प्रदेश के राजगढ़, मंदसौर, उज्जैन, नीमच, ग्वालियर, मुरैना, श्योपुर तथा गुना जिलों में भारी वर्षा की चेतावनी दी है।
जबलपुर, होशंगाबाद तथा शहडोल संभाग में कई स्थान पर भी भारी वर्षा की आशंका को देखते हुए किसानों को खरीफ फसलों की पौध सुरक्षा के लिये जल निकास करने की सलाह दी है। बताया गया है कि गुना के आसपास बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। इसके साथ ही मानसून के राजस्थान की ओर बढ़ने से प्रदेश में अभी हो रही लगभग सतत वर्षा में कमी आयेगी तथा कहीं-कहीं छिटपुट वर्षा ही होगी। कृषि विषेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी स्थिति में किसानों को खेतों में पानी नहीं भरा रहने देना चाहिये। अन्यथा पौधों के पीला पड़कर सड़ जाने की आशंका रहती है। केवल धान के खेतों में जल भराव की स्थिति में विशेष अन्तर नहीं पड़ेगा। किसान भाइयों से अपील की गई है कि वे मौसम की स्थिति को दृष्टिगत रखकर ही कृषि कार्य करें। बतर आने पर ही बोवाई का कार्य प्रारम्भ करें। इसके साथ ही बोवाई के लिये प्रयुक्त होने वाली आदान सामग्री- खाद, बीज, दवा आदि को सुरक्षित स्थान पर रखकर, नमी से बचायें। बतर मिलने पर जिन किसानों के पास सोयाबीन का बीज, उर्वरक तथा अन्य आदान सामग्री के अतिरिक्त सितम्बर-अक्टूबर माह में 1-2 सिंचाई के लायक पानी उपलब्ध हो, वे सोयाबीन की बोवनी 30 जुलाई तक कर सकते हैं। वर्षा आधारित खेती के लिये मूँग, उड़द, ज्वार, मक्का, बाजरा, कोदो, कुटकी, रागी, तिल तथा रामतिल आदि की बोवनी करने की अनुशंसा की गई है।