एक दशक में 322 नयी निजी-शासकीय आईटीआई स्थापित

प्रदेश में तेजी से औद्योगिकीकरण के चलते स्थापित होने वाले उद्योगों को तकनीकी रूप से प्रशिक्षित मेनपावर तैयार करने को राज्य सरकार ने सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रखा है।

इस काम को बेहतर अंजाम देने व्यवसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद् की स्थापना की गई है। साथ ही युवाओं के बेहतर कौशल उन्नयन के लिये अकेले पिछले एक दशक में 322 शासकीय और निजी आई.टी.आई. स्थापित की गई हैं। वर्ष 2003 में इनकी संख्या महज 177 थीं।

135 कौशल विकास केन्द्र भी स्थापित

युवाओं को आधुनिक उद्योगों की जरूरत के मुताबिक प्रशिक्षण के लिये अभी तक प्रदेश में 135 कौशल विकास केन्द्र की स्थापना की गई है। इन केन्द्रों पर 23 अलग-अलग विषय पर प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रत्येक केन्द्र में 4 विषय पर प्रशिक्षण दिया जाता है जिसके पूर्ण होने पर छात्रवृत्ति भी दी जाती है।

आई.टी.आई. प्रवेश क्षमता चार गुना बढी

राज्य सरकार ने आई.टी.आई. की संख्या बढ़ाने को भी तवज्जो दी है। वर्ष 2003 में 151 शासकीय आई.टी.आई. तथा 26 निजी आई.टी.आई. थी। वर्ष 2014 में यह बढ़कर क्रमश: 187 और 312 हो गई है। वर्ष 2014 में आई.टी.आई. की प्रवेश क्षमता वर्ष 2003 की तुलना में 15 हजार 157 से बढ़कर 61 हजार 982 हो गई है। अगस्त 2014 से 36 संस्था में 65 ट्रेड यूनिट प्रारंभ की गई, जिनमें 1816 सीट की वृद्धि हुई। इनमें टर्नर, मशीनिष्ट, मल्टीमीडिया, एनिमेशन एण्ड स्पेशल इफेक्टस, कम्प्यूटर ऑपरेटर एण्ड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट, कम्प्यूटर हार्डवेयर, हॉस्पि‍टिलेटी हाउसकीपिंग, मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव, आर्किटेक्ट असिस्टेंट आदि शामिल है। आई.टी.आई. के सभी ट्रेडस में एम्प्लायबिलिटी स्किल नाम से प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्मिलित किया जायेगा। उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप कुछ प्रायवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों में पॉलीटेक्नीक तथा आई.टी.आई. कोर्स को पढ़ाने के लिये प्रोत्साहित किया जा रहा है।

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