मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि केवल विकास दर बढ़ाने से काम नहीं चलेगा। विकास का लाभ प्रत्येक प्रदेशवासी को मिलना चाहिये। सुशासन का अर्थ ऐसी राज्य व्यवस्था बनाना है जिसमें हर व्यक्ति
शरीर, मन, बुद्धि, आत्मा से सुखी हों। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज यहाँ प्रशासन अकादमी में मंथन-2014 के उदघाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस तीसरे मंथन की थीम ‘सुशासन’ निर्धारित की गयी है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि राज्य शासन द्वारा वर्ष 2007 और वर्ष 2009 में आयोजित किये गये मंथन के बेहतर परिणाम मिले हैं। इनसे प्राप्त सुझावों के आधार पर कई प्रशासनिक सुधार किये गये तथा नई योजनाएँ प्रारंभ की गयीं। उन्होंने कहा कि मंथन के पीछे कोई सतही सोच नहीं है। यह टीम मध्यप्रदेश का प्रदेश की जनता को बेहतर सुविधाएँ देने का गंभीर प्रयास है। मंथन का उद्देश्य सुशासन के माध्यम से जनता को बेहतर सुविधाएँ देने वाली व्यवस्था बनाना है। उन्होंने कहा कि साम्यवाद, समाजवाद, पूँजीवाद आदि सभी विचारधाराओं के मूल में यह है कि मनुष्य को सुखी कैसे बनाया जाये परंतु भारतीय विचारधारा इससे आगे जाकर मनुष्य को निरोगी, सुखी और मनुष्य के कल्याण की बात करती है। भारतीय चिंतन में शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा के सुख की बात कही गयी है। श्री चौहान ने कहा कि शासन व्यवस्था ऐसी होना चाहिये जिसमें लोगों को अपने मन की प्रवृत्ति के अनुरूप काम करने का मौका मिले। आत्म-संतोष मिलने से जीवन सार्थक होता है।