उपभोग की इच्छा बढ़ने से संवर्धन की आदत मे आ रही है कमी – डा. नंदिता पाठक चित्रकूट क्षेत्र में जल की आवष्यकता, उपलब्धता, संरक्षण व संबर्धन विषय पर गोष्ठी आयोजित 17 मई 2013/एकात्म मानववाद के महान चिन्तक पं. दीनदयाल उपाध्याय जी की स्मृति मे राष्ट्रऋषि नानाजी देषमुख द्वारा स्थापित दीनदयाल शोध संस्थान देष के सुदूरवर्ती क्षेत्रों मे सामाजिक पुर्नरचना के कार्यो मे सतत् प्रयत्नषील है। प्रयत्नों की इसी श्रंखला मे चित्रकूट क्षेत्र के 50 कि0मी0 की परिधि मे आने वाले उ0प्र0 के चित्रकूट एवं म0प्र0 के सतना जिले के ग्राम स्वावलम्बन केन्द्रों के माध्यम से षिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलम्बन व सदाचार की दिषा मे नित नये-नये प्रयोग किये जा रहे हैं। प्रयोगों की इस श्रंखला मे बीच-बीच मे कार्यषालायें, गोष्ठिया एवं प्रषिक्षण षिविर भी आयोजित होते रहते हैं जिससे कार्यकर्ताओं को बीच-बीच मे नवीन जानकारियाॅं भी मिलती रहती हैं। गोष्ठियों के इसी क्रम में संस्थान के स्वास्थ्य प्रकल्प आरोग्यधाम के आयुर्वेद सदन के तत्वाधान मे ’’राष्ट्रीय प्रोद्यौगिकी दिवस’’ कार्यक्रम मनाया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता इं. विजय गुप्ता ने की, विषिष्ट अतिथि के रूप में डा. वेदप्रकाश सिंह एवं मुख्य अतिथि उद्यमिता विद्यापीठ की निदेशक डा. नंदिता पाठक रहीं। देवार्चन, पुष्पार्चन के बाद मनीषियों एवं वैज्ञानिको का स्मरण किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय था, ’’चित्रकूट क्षेत्र में जल की आवष्यकता, उपलब्धता, संरक्षण व संबर्धन’’ इस विषय पर अलग-अलग वक्ताओं ने अपने-अपने विचार रखे। डा0 वेदप्रकाष सिंह ने अपने विचार रखते हुए बताया कि राष्ट्रऋषि नानाजी की प्रेरणा एवं मार्गदर्षन मे 20 अगस्त 1994 को चित्रकूट के म0प्र0 क्षेत्र के सतना जिले मे कृषि विज्ञान केन्द्र,मझगवाॅं मे एक छोटे से माॅंडल को विकसित कर जल प्रबंधन का कार्य प्रारम्भ हुआ जिसके परिणाम आज पूरे जिले मे प्रत्यक्ष देखे जा सकते हैं। पूर्व राष्ट्रपति डा. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम एवं तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी ने स्वयं आकर इन प्रयासों का अवलोकन किया। डा0 अषोक तिवारी ने भी जल की उपयोगिता, इसके संरक्षण एवं अषुद्ध जल को किन-किन परम्परागत तरीकों मे जैसे शहजन के बीज डालकर आदि-आदि विधियों से शुद्ध कर प्रयोग मे लाया जा सकता है, इस पर विस्तार से प्रकाष डाला। डा. नंदिता पाठक ने अपनी प्रस्तुति का प्रारम्भ हमारे ऋषि-मुनियों एवं कवियों, लेखकों ने जल की महत्ता पर क्या-क्या कहा इसका उल्लेख करते हुये रहिमन पानी राखिये……………………….. से अपना विषय प्रारम्भ करते हुये अनेक छोटी-छोटी चीजों पर प्रकाष डाला जैसे मिट्टी के घड़े में पानी
रखना, ताॅंबे के वर्तन मे पानी रखना घर के पास वाटिका लगाकर वेकार बह रहे पानी का उपयोग करना आदि-आदि। आपने बताया उपभोग की इच्छा बढ़ने से संवर्धन की आदत मेे कमी आ रही है। अतः संबर्धन संरक्षण की दिषा मे हमें विषेष सार्थक प्रयास करना चाहिये तभी आज के इस आयोजन की उपयोगिता सिद्ध होगी। अपना अध्यक्षीय उद्बोधन प्रस्तुत करते हुये इं. विजय गुप्ता ने अत्यन्त सरल भाषा में जल संरक्षण संवर्धन के परम्परागत तरीकों पर प्रकाष डाला। प्रोद्योगिकी दिवस की इस कार्यषाला मे संस्थान के प्रषासनिक प्रबंधक डा. अनिल जायसवाल पूरे समय उपस्थित रहे। संस्थान के सभी प्रकल्पों के कार्यकर्ताओं की सहभागिता रही। कार्यक्रम का सफल संचालन आयुर्वेद सदन के डा0 मनोज त्रिपाठी ने किया। सर्वे भवन्तु सुखिनः से कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।