इलेक्ट्रॉनिक पंजीयन प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक स्टॉम्पिंग प्रणाली के परिप्रेक्ष्य में मध्यप्रदेश स्टॉम्प एक नवम्बर 2014 से नये संशोधन पूरे प्रदेश में प्रभावशील किये गये हैं। नये प्रावधान के अनुसार अब स्टॉम्प के विक्रय के लिए स्टॉम्प विक्रेता
के अलावा सर्विस प्रोवाइडर भी उपलब्ध होंगे। सर्विस प्रोवाइडर के दो वर्ग बनाये गये हैं। एक वर्ग में व्यक्ति विशेष होंगे, जिन्हें एक वर्ष के लिए लायसेंस दिया जायेगा। दूसरे वर्ग में बेंक, वित्तीय संस्थाएँ अथवा डाकघर भी सर्विस प्रोवाइडर बन सकेंगे। इन्हें अधिकतम दो वर्ष के लिए लायसेंस की पात्रता होगी।
लायसेंस तथा लायसेंस की नवीनीकरण की फीस 1000 रुपये निर्धारित की गई है, जो वापसी योग्य नहीं होगी। डुप्लीकेट लायसेंस के लिए फीस 500 रुपये रखी गई है। सर्विस प्रोवाइडर के लिए लायसेंस के सभी आवेदनों को एक माह की समय-सीमा में निराकृत करने का प्रावधान रखा गया है। सर्विस प्रोवाइडर के लिए यह आवश्यक है कि वह इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर, कम्प्यूटर, प्रिंटर, बॉयोमेट्रिक डिवाइस, इलेक्ट्रॉनिक राइटिंग पेन, वेब केमरा, यूपीएस, स्केनर और निर्धारित कम्प्यूटर पेरीफेरल के साथ ब्राडबेंड अथवा हाई स्पीड कनेक्शन की सुविधाएँ भी उपलब्ध करवाये।
सर्विस प्रोवाइडर इलेक्ट्रॉनिक पंजीयन प्रणाली के माध्यम से रजिस्ट्रीकरण की प्रक्रिया आरंभ कर सकेंगे। संपत्ति का मूल्यांकन, उस पर देय स्टॉम्प एवं पंजीयन शुल्क गणना इलेक्ट्रॉनिक पंजीयन प्रणाली के माध्यम से की जायेगी। दस्तावेजों का प्रारूपण तथा अनिवार्य रूप से पंजीयन योग्य दस्तावेजों के लिए स्लाट बुक करने की जिम्मेदारी भी सर्विस प्रोवाइडर की होगी। रजिस्ट्रीकृत दस्तावेजों की सर्च और उनकी प्रतियाँ डाउनलोड करने जैसी सेवाएँ भी सर्विस प्रोवाइडर आम जन को उपलब्ध करवा सकेंगे। जिन दस्तावेजों का पंजीयन अनिवार्य नहीं है, उनके संबंध में ई-स्टॉम्प कोड सर्विस प्रोवाइडर द्वारा ही जनरेट किया जायेगा। ई-स्टॉम्प खरीदने के लिए भुगतान का तरीका महानिरीक्षक पंजीयन द्वारा निर्धारित किया जायेगा। ई-स्टॉम्प के आवेदन के लिए प्रारूप भी नियमों में दिया गया है। जिन दस्तावेजों का पंजीयन अनिवार्य है, उनमें सर्विस प्रोवाइडर द्वारा केवल ई-स्टॉम्प कोड जारी किया जायेगा। यह ई-स्टॉम्प उप पंजीयक द्वारा ही जनरेट किया जायेगा। सर्विस प्रोवाइडर को इन कामों के लिए विभाग द्वारा यूनिक लॉग-इन आईडी तथा पासवर्ड जारी किया जायेगा। लायसेंस के निलम्बन अथवा रददकरण की स्थिति में पुनरीक्षण का अधिकार क्षेत्रीय उप महानिरीक्षक पंजीयन को दिया गया है। नये नियमों के अनुसार ऐसे मामलों में महानिरीक्षक पंजीयन का आदेश अंतिम माना जायेगा।