शौर्या दल की ताकत से अभिभूत हुए मुख्यमंत्री

शौर्या दल की ताकत से मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान अभिभूत हो गए। उन्होंने महिला-बाल विकास मंत्री श्रीमती माया सिंह एवं उनकी पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि एक दिन नहीं हर दिन हर पल बेटियों का हो, ऐसा मध्यप्रदेश बनाएंगे।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर हुए मुख्य समारोह में शौर्या दल और महिलाओं द्वारा घर की देहरी से निकलकर जो कार्य किए उसकी जीवंत प्रस्तुति देख मुख्यमंत्री बेहद प्रसन्न हुए।

छतरपुर जिले की कुंदरपुरा गाँव की श्रीमती सुखरनिया देवी एक आदिवासी महिला है। उसने बताया कि शराब की लत से गाँव की महिलाएँ परेशान थी। उसने शौर्या दल के साथ मिलकर गाँव की शराब की भट्टी तोड़ दी और पूरी तरह गाँव में शराबबंदी लागू कर दी। इसी तरह उसने गाँव की पाठशाला में नहीं आने वाले शिक्षक को समय पर आने के लिए मजबूर किया और आँगनवाड़ी समय पर खुले यह सुनिश्चित करवाया। यही नहीं उसने अपने गाँव की एक लड़की को बिकने से बचाया। उसके इस साहसिक कार्य के लिए राज्य शासन ने श्रीमती सुखरनिया देवी को राजमाता विजया राजे सिंधिया सम्मान से सम्मानित किया।

कु. श्यामू बाई बैस आज बी.ए. फाइनल की छात्रा है। वह अगर साहस नहीं दिखाती तो बाल-विवाह की बुराई से अभिशप्त होकर अपना जीवन बर्बाद कर लेती। उसने वर्ष 2005 में हुए अपने बाल-विवाह का विरोध किया और ससुराल जाने से इंकार कर दिया। उसकी इस हिम्मत के सामने माँ-बाप भी नतमस्तक हुए। श्यामूबाई ने सिर्फ ससुराल जाने से ही इंकार नहीं किया बल्कि अपने विवाह को न्यायालय के जरिए शून्य भी घोषित कराया। उसके इस कार्य में शौर्या दल ने सहायता की। श्यामूबाई को सामाजिक कुरूतियों के विरूद्ध लड़ी गई लड़ाई के लिए रानी अवंती बाई वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कु. दिव्या राठौर और कु. मुस्कान भार्गव के बाल विवाह की कहानी तो पिछले माह की ही है। इंदौर की बालिकाओं ने स्वयं आवेदन देकर अपना बाल विवाह रूकवाया। इसी तरह का साहस मंदसौर की भुवनेश्वरी रेकवार, सीहोर जिले की कु. मंजु वंशकार, अनूपपुर की पिंकी शुक्ला, काजल, मांगी पाटीदार, ज्योति, अनीता, ममता, रानू भावसार अहिरवार और देवास की आरती जाट ने दिखाया और अपना बाल विवाह रूकवाने के साथ ही शून्य घोषित करवाया। मंदसौर की ज्योति और देवास जिले के सिंगवादा की भारती जाट का विवाह तो 50 वर्ष की आयु के व्यक्ति से करवाया जा रहा था। मुख्यमंत्री ने इन सभी बालिकाओं का सम्मान अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर किया।

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