नेपाल में भूकम्पग्रस्त सभी जिलों में राहत और बचाव कार्य तेज कर दिये गये हैं। भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर दूरदराज के इलाकों में राहत सामग्री पहुंचा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन ने विस्थापितों के लिए वार्ड के हिसाब से राहत शिविर स्थापित करने का फैसला किया है। जिला प्रशासन के प्रमुख अनिल ठाकुर ने आकाशवाणी को बताया कि दस हजार से अधिक मकानों को बहुत नुकसान पहुंचा है।
घर ऐसा है कि उसको क्लियर करने में थोड़ा डिर्स्टबेंस भी है थोड़ा कंजस्टर्ड है। लेकिन हम उसको क्लियर कर रहे है। नेपाली सेना, इंडियन आर्मी हर जगह के लोग उसमें सहयोग कर रहे है और उसको क्लियर करने में हम लगे हुए है और पेरी फेरी एरिया में भी बहुत नुकसान हुआ है। लेकिन अब हम लोग प्लांड वे में है हर एक एरिया के लिए कैंप इस्टेबलिश करने जा रहे है। विभिन्न ऑर्गनाइजेंशन के लोग उसमें हेल्प कर रहे है लोगों को खाना पीने में हर प्रकार का सहयोग कर रहे है।
हमारे संवाददाता ने भूकंप से बुरी तरह प्रभावित भक्तपुर जिले का दौरा करने के बाद बताया है कि शहर में अब भी बड़ी संख्या में लोग अपने घरों को छोड़कर शिविरों में रह रहे हैं।
भारतीय वायुसेना ने अपने कई हेलीकॉप्टर राहत सामग्री पहुंचाने में लगाए हैं। प्राचीन शहर भक्तपुर में जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है। जिला प्रशासन विद्युत आपूर्ति और संचार व्यवस्था बहाल करने के लिए कई कदम उठाए हैं। भारतीय राहत कर्मी शहर के कई क्षतिग्रस्त भवनों से शवों को निकालने और गलियों और सड़कों में आवाजाही व्यवस्थित करने में जुटे है। विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों के स्वयंसेवक क्षतिग्रस्त दरबार स्क्वेयर से मलबों को हटाने और उसके पुराने गौरव को वापस लाने के काम में जुटे हुए है।
इस बीच भूकम्प में मरने वालों की संख्या सात हजार से अधिक हो गई है। नेपाल के गृह मंत्रालय के अनुसार 50 से अधिक विदेशी भी मारे गये हैं और 80 से अधिक लापता हैं। मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है। बचावकर्मी दूरदराज के कुछ इलाकों में अभी तक नहीं पहुंच पाये हैं। सरकार ने बताया है कि घायलों की संख्या 14 हजार से अधिक है। राजधानी काठमाण्डु और अन्य जिलों में कई मृतकों का अंतिम संस्कार उनकी पहचान किये बिना ही कर दिया गया है ताकि बीमारियों को फैलने से रोका जा सके।