मिस्र सरकार को देश के सर्वोच्च संवैधानिक न्यायालय ने तगड़ा झटका देते हुए कहा है कि देश के संविधान का प्रारूप बना रहे इस्लामी बहुल सीनेट और समूह कानूनी तौर पर अवैध हैं। न्यायालय ने संसद के उच्च सदन शूरा परिषद् की वैधता पर फैसला दिया है। पिछले वर्ष संसद के भंग होने के बाद इस सदन को विधायी शक्तियां दी गई थीं। हालांकि खबरों के अनुसार चुनाव होने और नई संसद के गठन होने तक शूरा परिषद् को भंग नहीं किया जा सकता। देश में आम चुनाव अक्टूबर में होने की संभावना है। न्यायालय ने कहा है कि इस्लामी बहुल समूह कानूनी रूप से अवैध है। इस समूह को पिछले वर्ष दिसंबर में चुना गया था और इसे संविधान का प्रारूप तय करने की जिम्मेदारी दी गई थी।