भोपाल में दसवें विश्व हिन्दी सम्मेलन में गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एपल और सीडेक आधुनिक प्रौद्योगिकी के साथ हिन्दी को शामिल करने की अपनी पहल प्रदर्शित कर रहे हैं। किये कंपनियां अपने हिन्दी एप्स और कार्यक्रमों का प्रदर्शन कर रही हैं।
10वां विश्व हिन्दी सम्मेलन में नई तकनीकों के इस्तेमाल के बारे में जानकारी मिल रही है। हमने सीडैक के अक्षत जोशी से बात की।
सीडैक जो पिछले 20 सालों से भाषा प्रौद्योगिकी में जो सारी लोगों के लिए तकनीकी वय बना रहा है। वो सारी तकनीकियां दर्शाने का प्रयास कर रहे हैं। वो हम कुछ मानकीकरण के प्रयासों में भी शामिल हैं। हम वो भी चीजें लोगों के सामने लाना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि लोग ज्यादा से ज्यादा मानकीकृत चीजें यूज करें। और जागतिक मानक जो बन रहे हैं अभी, उनमें भी सहभाग ले के अपनी भाषाओं के संवर्द्धन के लिए मदद करें।
गूगल की रीचा सिंह ने हिन्दी को लेकर कंपनी द्वारा की गई पहलों के बारे में जानकारी दी।
हिन्दी इनपुट बहुत डिफिकल्ट होता है आजकल, तो हमने कीबोर्ड्स बनाया है जो इंगलिस में लिखे लेकिन वो हिन्दी में कंवर्ट हो जाए, ताकि जो लोग उसको पढ़ रहे हैं पढ़ने में उनको मातृ भाषा का फील हो, इसके अलावा हैंडराइटिंग हैं, कई लोग को टाइपिंग स्पीड थोड़ी कम है तो अपना हैंडराइटिंग से उसमें लिखेंगे, और पूरा का पूरा डेटा उसमें चला जाता है। वाइस इनपुट है कि आपने सीधा बोला वाइस ऑन किया गूगल सर्च पर, बोला गूगल पर डेंगू के क्या लक्षण है, तो डेंगू से क्या बचाव हो सकते हैं। तो उसमें पूरा डिटेल दे देगा।
इस बार सम्मेलन में विभिन्न देशों से आए विदेशी मेहमान आकर्षण के विशेष केन्द्र हैं। जापान के ताकियो मिजोकॉमी, इंग्लैंड से ऊषा राज सक्सेना, इटली के मार्को जोली, फीजी के नीलम कुमार के अतिरिक्त स्वीडन और उज्बेकिस्तान के हिन्दी के अध्यापकों, हिन्दी सेवियों ने सम्मेलन की रौनक बढ़ा दी है। नीलम कुमार फीजी से शांति दूत नाम का हिन्दी अखबार अपनी निजी साधनों से निकालती हैं। उनका कहना है कि उन्हें अपने देश में हिन्दी बचाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ रहा है। भारत सरकार को इसमें कुछ मदद करनी चाहिए। हंगरी के डॉक्टर मारिया नजेसी, सऊदी अरब के इस्माइल ने चौकाने वाली जानकारी दी कि वहां अंतर्राष्ट्रीय भारत विश्व विद्यालय में 19 हजार छात्र हिन्दी पढ़ रहे हैं। 30 स्कूलों में सीबीएसई के माध्यम से हिन्दी पढ़ाई जा रही है। मिस्र की गुलनाज अब्दुल मजीद ने कहा कि भारतीयों को हिन्दी सीखने की उत्सुकता ज्यादा है। इंग्लैंड से आई कथाकार ऊषा राज सक्सेना का सम्मेलन में सम्मान किया जा रहा है।