हिन्दी भारत की राजभाषा के साथ संपर्क भाषा भी

केन्द्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि हिन्दी भारत की राजभाषा के साथ संपर्क भाषा भी है। भारत की संस्कृति और जीवन मूल्यों का प्रतिनिधित्व करने वाली भाषा हिन्दी है। गृह मंत्री श्री सिंह आज यहाँ 10वें विश्व हिन्दी सम्मेलन के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। समापन में सम्मेलन के दौरान 12 विषय पर आयोजित सत्रों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया।

गृह मंत्री श्री सिंह ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ की अधिकृत भाषा में हिन्दी शामिल होना चाहिये। जब अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के लिये दुनिया के 177 देश का समर्थन प्राप्त किया जा सकता है तो हिन्दी के लिये क्यों नहीं? हिन्दी दुनिया में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा में से एक है। टेक्नालॉजी कंपनियों ने हिन्दी के महत्व को समझा है और वे इसे बढ़ावा दे रही हैं। इंटरनेट पर जिस भाषा में सबसे अधिक कंटेंट जनरेट होता है वह भाषा हिन्दी है। भारत में बोली जाने वाली सबसे पुरानी भाषा तमिल है और राष्ट्रीय स्तर पर मातृ भाषा संस्कृत है। भौगोलिक और संख्यात्मक दृष्टि से सबसे बड़ी भाषा हिन्दी है जो संस्कृत के सबसे अधिक नजदीक है। स्वतंत्रता संग्राम को अखिल भारतीय स्वरूप देने का काम हिन्दी ने किया था। हिन्दी को राष्ट्र भाषा बनाने का समर्थन करने वाले महापुरूषों में अधिकांश गैर हिन्दीभाषी थे। नेतृत्व की कमजोरी से हिन्दी को राष्ट्र भाषा का दर्जा प्राप्त नहीं हो सका। हिन्दी वैज्ञानिक दृष्टि से सबसे समृद्ध भाषा है। हिन्दी के विकास में देश के साथ विदेशियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने कहा कि भारतीय उद्योग अपने सारे उत्पादों का नाम हिन्दी और क्षेत्रीय भाषाओं में लिखें। गैर हिन्दीभाषी क्षेत्रों में भी लोग हिन्दी समझते हैं। अंतर्राष्ट्रीय जगत में हिन्दी की प्रतिष्ठा पिछले दिनों बढ़ी है। हिन्दी को दूसरे देशों में जीवित रखने में गिरमिटिया लोगों का महत्वपूर्ण योगदान है।

हिन्दी को बढ़ावा देने के लिये मध्यप्रदेश में हरसंभव प्रयास

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सम्मेलन से हिन्दी के प्रति सकारात्मक वातावरण बना है। श्री चौहान ने कहा कि हिन्दी को प्रोत्साहित करने और बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश सरकार समाज के साथ मिलकर हरसंभव प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी बोलने वाले को श्रेष्ठ समझने की मानसिकता को बदलना होगा। उन्होंने कहा कि हमारे देश की संस्कृति और हिन्दी भाषा का गौरवपूर्ण इतिहास है। हिन्दी बोलने से सम्मान कम नहीं होता बल्कि और बढ़ता है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन की अनुशंसाओं पर भारत सरकार आवश्यक कार्रवाई करेगी। मध्यप्रदेश सरकार अपने स्तर पर हिन्दी को प्रोत्साहित करने के ठोस कदम उठाएगी। उन्होंने हिन्दी को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता जाहिर करते हुए घोषणा की कि प्रदेश में राजभाषा विभाग को पुनर्जीवित किया जाएगा। प्रदेश में उपभोक्ता वस्तुओं का नाम हिन्दी में लिखा जाएगा। कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर हिन्दी में बनाए जाएँगे और शासकीय विज्ञापन हिन्दी में जारी किए जाएँगे। उन्होंने घोषणा की कि अटल बिहारी हिन्दी विश्वविद्यालय को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का संस्थान बनाया जाएगा। हिन्दी का उपयोग करना मानव अधिकार माना जाएगा। उच्च न्यायालयों के निर्णय हिन्दी में उपलब्ध करवाने के लिए अनुवादक नियुक्त किए जाएँगे। हिन्दी और अन्य भारतीय भाषाओं के शब्दों को परस्पर ग्रहण किया जाएगा। जहाँ पर अँग्रेजी लिखना जरूरी होगा वहाँ हिन्दी में प्रमुखता से लिखा जाएगा। मध्यप्रदेश के सभी संस्थानों के नाम हिन्दी में लिखे जाएँगे। किसी अधिकारी-कर्मचारी के विरुद्ध हिन्दी में बोलने एवं काम करने पर निलंबन जैसी कार्रवाई नहीं की जाएगी। शासकीय पत्राचार हिन्दी में किया जाएगा। तकनीकी प्राक्कलन हिन्दी में बनाए जाएँगे। मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव एवं सभी विभागाध्यक्ष हिन्दी का प्रयोग करेंगे। प्रदेश में सभी प्रतियोगी परीक्षाएँ हिन्दी माध्यम में होगी। विधि अनुवादकों की नियुक्ति की जाएगी। हिन्दी अधिकारी नियुक्त किए जाएँगे। प्रदेश में हर वर्ष 14 सितम्बर को हिन्दी दिवस आयोजित किया जाएगा। हिन्दी को प्रोत्साहित करने वाले व्यक्तियों को हिन्दी दिवस पर सम्मानित किया जाएगा। गैर हिन्दीभाषी अधिकारियों को हिन्दी का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रदेश में सभी सूचनाएँ और अधिसूचनाएँ हिन्दी में जारी की जाएँगी।

 

 

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