मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज मंत्रालय में राज्य वन्य-प्राणी बोर्ड की 13 वीं बैठक में केन-बेतवा नदी जोड़ परियोजना के विभिन्न पक्ष पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
बोर्ड के सदस्य विशेषज्ञों ने परियोजना से वन्य जीवन पर संभावित प्रभावों पर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बात का पूरा ध्यान रखा जायेगा की वन्य-प्राणियों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं हो। उनके रहवास पर किसी प्रकार का संकट नहीं आये और परियोजना से पर्यावरण को किसी प्रकार क़ी हानि नहीं हो। इसके लिए उन्होंने सभी ऐहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए।
उल्लेखनीय है कि केन-बेतवा परियोजना से बुंदेलखंड क्षेत्र में सूखे की स्थिति समाप्त हो जायेगी। इससे 5.75 लाख हेक्टेयर क्षेत्र मे सिंचाई होगी और करीब 14 लाख लोगों को पीने का पानी मिलेगा।
बैठक में बोर्ड के सदस्यों की सहमति से केन-बेतवा प्रथम चरण की परियोजना पर सहमति एवं अनुमति लेने के लिए राष्ट्रीय वन्य-प्राणी बोर्ड को भेजने का फैसला लिया गया। बैठक में इन शर्तों पर सहमति बनी कि डूब प्रभावित कोर क्षेत्र के एवज में पूर्व की ओर अन्य वन क्षेत्र कोर के रूप में जोड़ा जायेगा। शामिल किये जाने वाले वन क्षेत्र में स्थित ग्रामों का पुनर्वास परियोजना व्यय पर किया जायेगा। कॉरीडोर के सुदृढ़ीकरण के लिए भारतीय वन्य-जीव संस्थान द्वारा लेण्ड स्केप मेनेजमेंट प्लानिंग की जायेगी। बाँध का निर्माण शीघ्र पूरा किया जायेगा तथा श्रमिकों को पन्ना राष्ट्रीय उद्यान के बाहर रखा जायेगा। बाँध निर्माण में उत्खनित सामग्री के अलावा अतिरिक्त निर्माण सामग्री की पूर्ति पन्ना राष्ट्रीय उद्यान के बाहर से होगी। गिद्धों के रहवास पर प्रभाव के मद्देनज़र परियोजना व्यय पर बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी द्वारा अध्ययन किया जायेगा। बाँध के नीचे केन नदी में इकोलॉजिकल फ्लो सुनिश्चित किया जायेगा।