गृह एवं जेल मंत्री श्री बाबूलाल गौर ने कहा कि डायल 100 योजना के स्टाफ को बेहतर ढंग से प्रशिक्षित करें। आधुनिक संचार तकनीक से डायल 100 योजना प्रदेश पुलिस की क्षमता को बढ़ाने के साथ आम आदमी को अपने पास पुलिस सुरक्षा का अहसास करवायेगी और अपराधों पर कारगर नियंत्रण करेगी। योजना सौ फीसदी सफल हो इसके लिए जरुरी है कि प्रशिक्षण पर ध्यान दिया जाये। श्री गौर आज डायल 100 योजना की तैयारियों का जायजा वायरलेस कार्यालय, भोपाल में ले रहे थे। योजना एक नवम्बर 2015 से शुरू होगी।
श्री गौर ने योजना में पुलिस को दिये जा रहे वाहनों का भी अवलोकन किया। इन वाहन में संचार उपकरण, केमरा, स्क्रीन, जी.पी.एस. एम.डी.टी. सहित रास्ता दुरस्त के उपकरण और फर्स्ट एड मेडीकल किट सहित दो दर्जन से अधिक उपकरण लगाये गये है। अग्निशमन यंत्र भी इनमें रहेगा। सूचना देने-लेने के लिए बनाया गया सिस्टम दो लेयर का है। इसमें एक हमेश स्टैंडबाय में तैयार रहेगा। आधुनिक टेलीफोन डिवाइस का उपयोग किया गया है। इस सेवा को सौ प्रतिशत गारंटी के साथ निर्बाध और बिना रूके 24 घंटे चालू रखने की व्यवस्था के साथ देने की तैयारी की गई है।
श्री गौर ने बताया कि थाना पुलिस बल का एक सहायक उप निरीक्षक अथवा हवलदार और एक आरक्षक वाहन चालक के साथ एफ.आर.व्ही. (फर्स्ट रिस्पान्स व्हीकल) में मौजूद रहेगा। इसको एक निर्धारित क्षेत्र आवंटित होगा और स्टेट सेन्टर की जद में रहेगा। निर्देश मिलते ही वाहन तुरंत स्थल पर पहुँचेगा। इसमें विशेष प्रकार का सायरन लगाया गया है।
श्री गौर ने बताया कि जैसे ही कोई 100 डायल करेगा उसके काल रिसीव करने के लिए चौबीस घंटा 80 एक्सपर्ट रहेंगे। यह कॉल टेकर कॉल डिस्पेचर को सूचना देंगे। स्टेट सेन्टर में मौजूद 20 कॉल डिस्पेचर तत्काल संबंधित एफ.आर.व्ही. को संदेश देंगें। इसके लिए 300 कॉल टेकर और 80 कॉल डिस्पेचर को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
ए.डी.जी. दूरसंचार श्री अन्वेष मंगलम ने जानकारी दी कि देश की यह पहली राज्य स्तरीय सेवा है। एक हजार एफ.आर.व्ही. में 10 हजार पुलिसकर्मी तैनात रहेंगें। इस 634 करोड़ की योजना में कॉल करने पर शहरों में 5 मिनिट और ग्रामीण क्षेत्र में 30 मिनिट में पुलिस आपके पास होगी।