ऊर्जा, खनिज साधन तथा जनसम्पर्क मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि हमें नियम-कानून के पालन की प्रवृत्ति विकसित करना होगी । उन्होंने कहा कि संविधान की छाया में निर्मित नियम-कानूनों के माध्यम से ही हम एक श्रेष्ठ और सुखी समाज की रचना कर सकते हैं । श्री शुक्ल आज शासकीय विधि महाविद्यालय, रीवा में विधि दिवस समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर संविधान की उद्देशिका का समवेत स्वर में वाचन कर संकल्प भी लिया गया।
श्री शुक्ल ने विभिन्न देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वे लोग स्वभावत: नियम-कानून का पालन करते हैं। हमें भी उनके स्तर तक आना होगा । सही जगह गाड़ी पार्किंग करना, ट्रेफिक रूल का पालन करना, सड़कों पर कचरा न फेंकना जैसी बातों को हमें अपनी दिनचर्या में शामिल करना होगा। हमारे मन में नियम-कानूनों के प्रति आदर का भाव होना चाहिए क्योंकि ये हमारी सुविधा के लिये ही बनाये गये हैं ।
जनसंपर्क मंत्री ने संविधान की चर्चा करते हुए कहा कि यह हमारे लिये गौरव और सम्मान का विषय है कि हमारे पास विश्व का उत्कृष्ट संविधान है। सबका साथ, सबका विकास, समता, समानता और सभी के लिये समान अवसर हमारे संविधान की मंशा है। उन्होंने विधि दिवस के आयोजन पर कहा कि यह आम जन को कानून के प्रति जागरूक करने का एक सशक्त माध्यम है। हमें कानून का पालन करने वाले नागरिकों का श्रेष्ठ समाज गढ़ना है जिससे देश की उन्नति हो। श्री शुक्ल ने विधि छात्रों को उनके उज्जवल भविष्य की शुभकामना देते हुए कहा कि वे अपनी शिक्षा का उपयोग रचनात्मक कार्य में लगाते हुए देश और प्रदेश की प्रगति को नई दिशा दें।
वरिष्ठ अधिवक्ता श्री घनश्याम सिंह ने भारत के संविधान की विशिष्टता पर विस्तार से प्रकाश डाला और विधि छात्रों से कहा कि वे इसका अध्ययन अवश्य करें। श्री सिंह ने न्यायिक स्वतंत्रता की चर्चा करते हुए कहा कि कानून एक श्रेष्ठ समाज की रचना में सहायक होता है।
समारोह के अध्यक्ष प्रभारी कुलपति डॉ. सी.के.शर्मा ने कहा कि लोगों को कानून के प्रति जागरूक किये जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि नियम-कानून तो सक्षम है, जरूरत इस बात की है कि क्रियान्वयन एजेंसी इनका प्रभावी ढंग से पालन करवाये। प्राचार्य डॉ. सुरेन्द्र प्रताप सिंह ने विषय प्रवर्तन करते हुए विधि दिवस मनाये जाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला ।