अटल बाल आरोग्य मिशन से आयी कुपोषण में कमी

कुपोषण के विरूद्ध चले सुपोषण अभियान के बेहतर परिणाम सामने आये हैं। वर्ष 2005-06 में विभिन्न श्रेणियों में कुपोषण में 56 से लेकर 16 प्रतिशत की कमी आयी है। यह परिणाम अटल बिहारी वाजपेयी बाल आरोग्य एवं पोषण मिशन की गतिविधियों से आये हैं। महिला- बाल विकास मंत्री श्रीमती माया सिंह ने यह जानकारी देते हुए बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म दिवस 25 दिसम्बर 2010 को यह मिशन शुरू हुआ था।

मंत्री श्रीमती माया सिंह ने बताया कि पिछले पाँच साल में मिशन ने अपने लक्ष्य पूर्ति के लिये प्रदेश में सात चरण में सुपोषण अभियान चलाया। इसमें 15357 शिविर लगाये गये। जिनमें एक लाख 68 हजार अति कम वजन के बच्चों को लाभान्वित किया गया। इन शिविरों के जरिये की गई गतिविधियों से कुपोषण में भारी कमी रेखांकित हुई। वर्ष 2005-06 में हुए सर्वे में सामान्य से कम वजन वाले बच्चों का प्रतिशत 60 था जो वर्ष 2013-14 में घटकर 36.1 प्रतिशत हो गया। इसमें 39.8 प्रतिशत की गिरावट आयी है। अतिकम वजन वाले बच्चों का कुपोषण 27.3 प्रतिशत था जो घटकर 12 प्रतिशत हो गया। इसमें 56 प्रतिशत की कमी रेखांकित हुई है। ऊँचाई के अनुपात में कम वजन 35 प्रतिशत से घटकर 17.5 प्रतिशत गंभीर कुपोषण 12.6 प्रतिशत से घटकर 5.4 प्रतिशत उम्र के अनुपात कम ऊँचाई का कुपोषण 50 से घटकर 41.6 प्रतिशत और अतिकम ऊँचाई बच्चों का कुपोषण 26.3 प्रतिशत से घटकर 18.5 प्रतिशत हो गया है।

मंत्री श्रीमती सिंह ने बताया कि अटल बाल आरोग्य मिशन में सुपोषण अभियान के अलावा 5 जिले में गर्भवती धात्री माताओं के पोषण स्तर में सुधार के लिये एक टाइम पूरा भोजन देने की शुरूआत पायलट तौर पर प्रदेश के सर्वाधिक कम वजन के बच्चों वाले जिले सतना, बड़वानी, अलीराजपुर, डिंडोरी एवं उमरिया में शुरू किया गया है। इसमें गर्भवती धात्री माताओं को भोजन के अतिरिक्त एक मौसमी फल, लड्डू और हलवा प्रतिदिन दिया जाता है। चलित आंगनवाड़ी इंदौर, भोपाल ग्वालियर एवं उज्जैन में शुरू की गयी है। कम वजन के बच्चों पर निरंतर निगरानी रखने के लिये 11 हजार इलेक्ट्रॉनिक वेइंग मशीन और 3 हजार सॉल्टर वेइंग मशीन आंगनवाड़ियों को दी गयी है।

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