प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि आतंकवाद से लड़ाई किसी धर्म के खिलाफ नहीं है। चार दिन के विश्व सूफी सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए श्री मोदी ने कहा कि धर्म के नाम पर आतंक फैलाने वाले लोग धर्म विरोधी हैं। श्री मोदी ने कहा कि सूफीवाद को दुनिया का मार्गदर्शन करना चाहिए क्योंकि आतंकवाद मनुष्य को बांटने की कोशिश कर रहा है।
Terrorism devids and distroy us. Indeed when terrorism and exteremism have become the most destructive force of our times. The message of sufism has global relevance.
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में उदारता और बहुलता के माहौल में सूफीवाद पनपा तथा इसकी अपनी आध्यात्मिक परम्परा और मूल्य रहे हैं। प्रधानमंत्री ने भाईचारे को बढ़ावा देने का आह्वान करते हुए दक्षिण एशियाई देशों से सूफीवाद की संस्कृति को फिर से जीवित करने और बढ़ावा देने का अनुरोध किया।
Sufism is the voice of peace, co-existence, compassion and equality; a call to universal brotherhood. And, just as India became a principal center of Islamic civilisation, our nation also emerged as one of the most vibrant hubs of Sufism.
मोदी ने काव्य और भारतीय संगीत में सूफीवाद के योगदान को भी याद किया। विश्व सूफी सम्मेलन में श्यूख, अध्यात्मिक नेता, विद्वान और सूफी उलेमा सहित दो सौ से अधिक भारतीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इसका आयोजन भारत में सूफी दरगाहों के प्रमुख निकाय ऑल इंडिया उलेमा मुशाइख बोर्ड ने किया है।