नरबाई जलाने की परंपरा को हतोत्साहित करना अनिवार्य

किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग मंत्रालय द्वारा नरबाई जलाने की परंपरा को हतोत्साहित करने के लिए निर्देशित किया गया है । रबी सीजन में गेहूं, बहुतायत बोया जाता है मजदूर समस्या, समय की कमी एवं सुगमता के कारण प्रदेश में हार्वेस्टर का प्रचलन बढा है।

हार्वेस्टर से कटाई होने पर फसल अवशेष बडी मात्रा में खेत में शेष बचते है। कृषक सुविधा के तहत खेतो में बचे अवशेषों नरवाई में आग लगाते है, जिससे भूमि की उर्वरकता जल धारण क्षमता एवं जैव अंश नष्ट हो जाते है। ऐसी स्थिति में कृषक भाईयों को नरवाई जलाने की परंपरा से हतोत्साहित किया जाना अनिवार्य है।

कृषकों से अनुरोध किया गया है कि प्रचलित आधुनिक यंत्र जैसे स्ट्रारीपर, रीपर कमबाईडर, रोटावेटर, हेप्पी सीडर का प्रचलन अपनाये एवं नरवाई जलाने की प्रथा को समाप्त करें। साथ ही स्ट्रारीपर, रीपर कमबाईडर से फसलो की कटाई कर खेतो में बचे फसल अवशेषो को मिट्टी में मिलाकर कम्पोस्ट खाद के रूप में उपयोग करते हुए नरवाई जलाने की प्रथा को समाप्त किया जाये।

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