सिंहस्थ का दूसरा शाही स्नान 9 मई को भारी उल्लास उमंग एवं भक्ति-भाव के साथ सम्पन्न हुआ। निर्वाणी अखाड़े के साधु-संत ने रामघाट में आस्था एवं भक्ति से ओतप्रोत होकर क्षिप्रा में अमृत की डूबकी लगाई। संत-महात्मा, साधु-संत, पथ-प्रदर्शक ने दौड़ते हुए महादेव के जयकारे के साथ सामूहिक स्नान किया। अखाड़ों के नागा साधुओं के स्नान का राम घाट विशेष आकर्षण का केन्द्र रहा। शाही स्नान में आस्था, अमृत और आत्मा का अनोखा संगम देखने को मिला।
रामघाट का अनोखा एवं विहृंगम दृश्य साधु-संतों एवं महात्माओं का सामुहिक अमृत स्नान भगवान शिव की महिमा से अच्छादित सा हो गया था। श्री पंच निर्वाणी अखाड़ा के महंत श्री धर्मराज श्री महाराज के साथ सैकड़ों साधु-संतों ने क्षिप्रा आरती द्वार पर मोक्ष दायिनी क्षिप्रा में अमृत स्नान किया। श्री निर्मोही अणि अखाड़ा, निर्वाणी अणि अखाड़ा, दिगम्बर अणि अखाड़ा, श्री पंचायती उदासीन बड़ा अखाड़ा, श्री पंचायती नया उदासीन अखाड़ा तथा श्री निर्मल अखाड़ा के साधु-संतों ने रामघाट में शाही स्नान किया। शाही स्नान के लिए पंच निर्वाणी अखाड़ों के साधु-संत टेक्ट्रर ट्राली एवं अन्य वाहनों में सजे रथों पर सवार थे। छत्र और चँवर के साथ इन रथों का आकर्षण देखते ही बनता था। पंच निर्वाणी अखाड़े के युवा साधु-संत विभिन्न शस्त्र कलाओं का प्रदर्शन भी कर रहे थे। वही बुजुर्ग साधु-संतों को गोद में लेकर गुरू-शिष्य परम्परा को जीवंत किया। रामघाट पहुँचने पर सर्वप्रथम आयुक्त नगर-निगम एवं मेला अधिकारी श्री अविनाश लावानिया सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने पुष्पहार भेंट कर अखाड़ों के साधु-संतों का स्वागत किया।

तीर्थ पुरोहित पंडित विजय त्रिवेदी रतलामी ने पंच निर्वाणी अखाड़ों की पूजन विधि सम्पन्न कराई। श्री लावानिया और श्री महंत धर्मराज जी महाराज ने शाही पूजन किया। पूजन के बाद श्री लावानिया ने महंत श्री धर्मराज जी महाराज और पंडित विजय त्रिवेदी को चॉदी का सिक्का भेंट किया। इसके बाद दिगम्बर अखाड़े के साधु-संत अपने अनुयायी साधु-संतों के साथ रामघाट आरती द्वार पहुँचे। अखाड़े के सभी संतों ने मोक्ष दायिनी सलिला क्षिप्रा में उत्साह के साथ स्नान किया।