लोक सभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन ने कहा है कि कुम्भ का मतलब तन-मन और विचारों का शुद्धिकरण है । स्नान से शरीर स्वस्थ, मन पवित्र और संतों के सत्संग से भविष्य का मार्गदर्शन मिलता है। विचारों का शुद्धिकरण होता है।
उन्होंने कहा कि विचार कुम्भ का आयोजन भारतीय संस्कृति की इसी गौरवशाली परंपरा का सफल निर्वहन है। श्रीमती महाजन ने आज निनोरा (उज्जैन) सिंहस्थ विचार कुंभ में सम्यक जीवन सत्र में अध्यक्षीय उदबोधन दिया। 
श्रीमती महाजन ने कहा कि व्यक्तित्व का विकास कर उसे समूह को अर्पित करने का भाव भारतीय संस्कृति का मूल है। उन्होंने कहा कि विश्व को भारतीय संस्कृति का योगदान हजारों वर्षों का है। भविष्य में भी विश्व के सतत विकास को कायम रखने में भारतीय संस्कृति का योगदान महत्वपूर्ण रहेगा। भारतीय संस्कृति सह-अस्तित्व और सहयोग की भावना के लिए सारी दुनिया में आदर भाव रखती है। श्रीमती महाजन ने कहा कि भारतीय संस्कृति ने दुनिया को नर्चर द नेचर सिखाया है। यहाँ पंच महाभूतों की उपासना की जाती है। नदियाँ जीवन के प्रवाह का दिग्दर्शन करवाती है। नदियाँ किसी भी सभ्यता की जीवन रेखा होती हैं। भारतीय संस्कृति भी नदियों के समान प्रवहमान है। दुनिया का सबसे बड़ा विशाल और मजबूत लोकतंत्र भारत, विभिन्नताओं में एकता का अद्भुत उदाहरण है। विचारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भारतीय संस्कृति के आधारभूत तत्व है। यहाँ विचारों की भिन्नता में भी सत्य की एकता का मूल है। ऋषि चार्वाक की विचारधारा का भाव भी भारतीय संस्कृति के मूल से अलग नहीं है।
भूटान के सूचना एवं संचार मंत्री श्री डी.एन थुंगवेल ने कहा कि विचार कुंभ का आयोजन प्रासंगिक प्रयास है। यह सम-सामयिक चुनौतियों पर विचार का उपयुक्त अवसर है। आर्थिक विकास और सम्पन्नता आवश्यक है किन्तु वह पर्यावरण, संस्कृति और जीवन-मूल्यों की कीमत पर नहीं होनी चाहिये। अत्यधिक बाजारवाद से सांस्कृतिक परंपराओं को क्षति नहीं हो, यह जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रसन्नता के लिये भौतिक और मनोवैज्ञानिक प्रयास जरूरी है। भूटानवासियों की प्रसन्नता के लिये सरकार द्वारा प्रभावी प्रयास किये जा रहे हैं। व्यक्ति की प्रसन्नता के लिये संवहनीय और समतायुक्त सामाजिक, आर्थिक व्यवस्थाएँ और सुशासन के कार्य किये गये हैं। उन्होंने कहा कि भारत की सभ्यता विश्व की महानतम है, जिसके पास ज्ञान और दर्शन की समृद्ध धरोहर है। इस धरोहर के साथ भारत को विश्व का नेतृत्व करना चाहिये। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों का मूल एक है। प्रेम, सहिष्णुता, समभाव और सहयोग मानवता के आधार हैं।
झारखण्ड के मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने कहा कि विचार कुंभ से भारतीय संस्कृति, आध्यात्म और मनीषियों के चिंतन की धरोहर को वैश्विक मान्यता मिलेगी। उन्होंने कहा कि कुंभ का आयोजन विश्व का सबसे बड़ा मानव समागम है। इस अवसर पर भारतीय संस्कृति को विश्व स्तर पर स्थापित करने का कार्य मध्यप्रदेश सरकार ने सफलता से किया है। उन्होंने आयोजन संबंधी व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए झारखण्ड के श्रद्धालुओं की ओर से बधाई दी। उन्होंने कहा कि कुंभ के सफल संचालन के लिये मध्यप्रदेश का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्डस में दर्ज होना चाहिये।
नेपाल काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स के भूतपूर्व चेयरमेन श्री के.आर. रेग्मी ने कहा कि आप अच्छे हैं तो सब अच्छे हैं यही जीवन का सत्य है। व्यक्ति अपने जीवन का नेतृत्व स्वयं करता है। अपने विचार और व्यवहार से स्वयं के भविष्य का निर्माण करता है। उन्होंने कहा कि विचारों में सकारात्मकता हो। उन सभी चीजों का त्याग करें, जो स्वयं के लिये नहीं चाहते हैं। केवल अपने बारे में ही नहीं दूसरे के बारे में भी सोचें। व्यक्ति का विश्वास ही उसके व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं। व्यक्ति का चरित्र ही उसका भाग्य है।
श्रीलंका के नेता प्रतिपक्ष श्री आर. सम्पंथान ने कहा कि व्यक्ति के व्यक्तिगत आचरण का प्रभाव सम्पूर्ण मानवता पर होता है। हम जिन नैतिक मूल्यों का पालन करते हैं वही हमारी समाज और संस्कृति का निर्माण करते हैं। सारा विश्व सबके लिये है कुछ के लिये नहीं। जीवन जीने का यही आधार है। आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक व्यवस्थाएँ, पर्यावरण और संस्कृति सामूहिकता का परिणाम है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि विचार कुंभ का चिंतन मानवता के कल्याण का ऐतिहासिक प्रयास होगा।
नेपाल के मेम्बर ऑफ पार्लियामेंट श्री महंत ठाकुर ने कहा कि आध्यात्मिकता के क्षेत्र में भारत का विश्व में बहुमूल्य योगदान है। उन्होंने भारत-नेपाल के आपसी संबंधों का उल्लेख करते हुये कहा कि वर्तमान का नेपाल लोकतंत्रीकरण के संक्रमण काल से गुजर रहा है। शांतिपूर्ण तरीके से वर्तमान समस्याओं के समाधान और पुनर्निर्माण के कार्य हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि नेपाल की भूकंप की प्राकृतिक आपदा में सहयोग करने वालों में भारत अग्रणी रहा है। भारत और नेपाल के अंतर्संबंधों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की समृद्धि से नेपाल की समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
मेम्बर ऑफ पार्लियामेंट बांग्लादेश श्री साधनचंद्र मजूमदार ने भारत-बांग्लादेश के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि बांग्लादेश में ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य, विद्युतीकरण और भू-प्रबंधन के क्षेत्र में निरंतर प्रयास कर आम आदमी के जीवन को बेहतर बनाने के प्रयास किये जा रहे हैं।
इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन ने सांसद श्री अनिल माधव दवे की पुस्तक ‘सदानीरा” का विमोचन किया। केन्द्रीय खनन एवं इस्पात मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री थावरचंद्र गेहलोत, प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति राज्य मंत्री श्री सुरेन्द्र पटवा भी उपस्थित थे।