मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के सफल क्रियान्वयन एवं उपलब्धियों के फलस्वरूप उसके नवाचारों को राष्ट्रीय-स्तर पर अन्य प्रदेशों द्वारा अपनाया जा रहा है। बैंक सखी योजना को नई दिल्ली में कार्यशाला में प्रेजेन्टेशन के दौरान सराहना मिली और अन्य प्रदेशों में भी अपनाये जाने की सिफारिश की गयी। हाल ही में राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज संस्थान, हैदराबाद में राज्य-स्तरीय प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण शिविर में भी इस योजना की सराहना की गयी।
मिशन द्वारा प्रदेश में महिलाओं को संगठित कर प्रशिक्षण एवं समूह सदस्यों के परिवारों को उपयोगी स्व-रोजगार एवं कौशल आधारित रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाये गये हैं। इसकी प्रशंसा शहडोल भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा भी की गयी।
बैंक सखी योजना में गाँव की शिक्षित महिलाओं को बैंकिंग प्रक्रिया के लिये अधिकृत किया गया है। गाँव-गाँव जाकर बैंक में खाते खुलवाने का काम किया गया। इसके लिये उन्हें बैंक से कमीशन भी दिया गया। जब बैंक सखी का काम ठीक लगा तो बैंकों ने उन्हें प्रोत्साहन राशि देना भी शुरू कर दिया। अब प्रदेश में लगभग 500 बैंकिंग कॉरेस्पान्डेन्ट्स ग्रामीण महिलाओं के रूप में तैनात करने की तैयारी आजीविका मिशन द्वारा की जा रही है। बड़वानी, राजगढ़ और अलीराजपुर में 158 गाँव के समूह-सदस्यों को बैंकों की भाग-दौड़ से मुक्ति दिलवाने के उद्देश्य से बैंकिंग कॉरेस्पान्डेन्ट्स की तैनाती की गयी है। इससे वित्तीय समावेशन को गति मिलेगी तथा महिलाओं की आजीविका में प्रगति होगी।
प्रदेश में आजीविका मिशन की शुरूआत अप्रैल, 2012 में की गयी थी। मिशन द्वारा ग्रामीण गरीब परिवार की महिलाओं के सशक्त स्व-सहायता समूह बनाकर उनका संस्थागत विकास तथा आजीविका के अवसर मुहैया कराने का कार्य किया जा रहा है।