नई दिल्ली। दिल्ली और एनसीआर में छाई धुंध और वायु प्रदूषण ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। मौसम वैज्ञानिकों ने कहा कि स्मॉग की कंडीशन दिल्ली के इन्वाइरनमेंट में एक हफ्ते तक बनी रहने की आशंका है।
हवा में मौजूद प्रदूषित कण अभी दिल्ली में एयर लॉक हो चुके हैं, जिनसे यह आगे मूव नहीं हो रहे हैं। पॉल्यूशन के बढ़ते स्तर के कारण स्मॉग दर्ज हो रहा है। आइए, जानते हैं क्या होता है यह स्मॉग और इसके खतरे क्या हैं…
स्मॉग मतलब ‘स्मोक’ और ‘फॉग’ का जहरीला कॉकटेल
स्मॉग उस प्रदूषित हवा को कहा जाता है जो धुएं (स्मोक) और कुहासे (फॉग) के मेल से बनी होती है। इसे धुआंसा या धूम कोहरा भी कहते हैं। गाड़ियों और फैक्टरियों से निकले धुएं में मौजूद राख, सल्फर और बाकी की खतरनाक गैसें जब कोहरे के संपर्क में आती हैं तो स्मॉग बनता। यह स्मॉग वायू प्रदूषण से पैदा होने वाली कई बीमारियों का कारण बनता है।
स्मॉग का पड़ता है बुरा असर
स्मॉग की वजह से बाल तेजी से झड़ सकते हैं, साथ ही लोगों को खांसी और ब्रॉन्काइटिस जैसी खतरनाक बीमारियां पकड़ सकती हैं। इसकी वजह से दिल की बीमारी, हार्ट अटैक, त्वचा संबंधी रोग, ब्लड कैंसर और फेफड़ों में इन्फेक्शन के साथ-साथ कैंसर भी हो सकता है।
स्मॉग इम्यून सिस्टम को भी कमजोर बनाता है। यही नहीं, आंखों में एलर्जी और नाक, कान, गले में इन्फेक्शन भी हो सकता है। इसकी वह से सांस लेने में भी दिक्कत होती है और बीपी के मरीज को ब्रेन स्ट्रोक तक हो सकता है।
बचने के लिए ये तरीके अपनाएं
मास्क पहनें: स्मॉग से बचने के लिए डस्ट मास्क कारगर नहीं है। इस पर ज्यादा निर्भर न रहें। इससे बचने के लिए आपको एन95 या पी100 रेस्पीरेटर का उपयोग करना चाहिए।
वर्कआउट से बचें: स्मॉग की हालत में वर्कआउट नहीं करना चाहिए। साफ शब्दों में कहा जाए तो इस दौरान आपको कोई ऐसा काम नहीं करना चाहिए, जिसमें आपको तेज सांस लेने की जरूरत पड़े।
गैस चूल्हे और मोमबत्ती के पास न बैठें: घर में आपको गैस चूल्हे, अगरबत्ती और मोमबत्ती के पास नहीं बैठना चाहिए। वैक्यूम क्लीनर का इस्तेमाल भी तभी करना चाहिए जब उसमें हेपा फिल्टर लगा हो।
एसी भी यूं ही न चलाएं: आपको एसी भी तभी चलाना चाहिए जब इसमें फिल्टर लगे हों। या फिर आपका एसी ऐसा हो जो बाहर से हवा अंदर की तरफ न खींचे।
दरवाजे, खिड़कियां बंद करके सोएं: किसी ऐसे कमरे में सोएं जिसमें दरवाजों और खिड़कियों की संख्या कम हो। खिड़कियों को बंद ही रखें या खुला भी रखना चाहें, तो इस बात का भी ध्यान रखें कि उसमें बाहर की हवा कम से कम आती हो।
ऐसा मास्क खरीदें
मास्क को खरीदने से पहले उसे कई पैमानों पर चेक कर लें। मसलन, आपको कम से कम एन95 रेटिंग वाला मास्क ही लेना चाहिए। मास्क लेने से पहले उसकी फिटिंग चेक कर लें और सुनिश्चित कर लें कि मास्क में गैप्स न हों। छोटे बच्चों के लिए छोटा मास्क लें।
मास्क किसी ऐसे मटीरियल से बना हो जो (PM2.5) कणों को रोक सके। आपको साधारण हरे/नीले रंग वाले क्लिनिकल मास्क लेने से परहेज करना चाहिए। सांस लेने में ज्यादा दिक्कत हो, तो डॉक्टरी सलाह से मास्क लें।
बाजार में तमाम कंपनियों के मास्क उपलब्ध हैं लेकिन Vogmask, Venus, 3M, Respro, Neomask और Totobobo जैसी कंपनियों के मास्क्स की अच्छी रेटिंग है। जहां तक मास्क की कीमत का सवाल है, तो यह आपको 150 रुपए से लेकर 5000 रुपए तक में मिल सकते हैं।