एक हजार और पांच सौ के नोट बंद होने से भले ही लोगों की कई परेशानियां बढ़ी हों लेकिन एक अच्छी बात ये हुई है कि नोटबंदी के बाद से प्रदेश के बड़े शहरों में शराब की खपत पच्चीस से पचास फीसदी तक कम हो गई है।
जब शराब कम पी जा रही है तो नशे की हालत में मारपीट की घटनाओं में भी भारी कमी आई है। हालांकि शराब के कारोबार में कमी से सरकार के राजस्व में तो बिलकुल कमी नहीं आएगी लेकिन शराब के ठेकेदारों को करोड़ों का नुकसान हो रहा है।
ऐसे घटी खपत (प्रतिदिन)
शहर आम दिनों में बिक्री नोटबंदी के बाद
भोपाल 1 करोड़ 25 लाख एक करोड़
इंदौर 1 करोड़ 75 लाख एक करोड़ से कम
जबलपुर 85 लाख 40 लाख
छोटे नोट जुगाड़ रहे ठेकेदार
शराब की बिक्री में आई गिरावट की मुख्य वजह छोटे नोटों की कमी को ही बताया जा रहा है । अब शराब ठेकेदार अपने घाटे को कम करने के लिए 100,50 और 10,20 रुपए के नोट जुगाड़ रहे हैं । साथ ही कुछ ठेकेदारों ने अपने नियमित ग्राहकों को उधारी में शराब देनी भी शुरू कर दी है, लेकिन यह सुविधा चुनिंदा ग्राहकों तक ही सीमित है।
शराब कारोबारियों की मानें तो जब तक बाजार में नए नोट पर्याप्त मात्रा में नहीं आएंगे तब तक उनका धंधा सामान्य नहीं होगा। उनका कहना है कि सरकार के पास हमें पूरी राशि जमा करना है और घाटा भी हम को ही उठाना होगा।
अपराध का ग्राफ गिरा
शराब की बिक्री कम होने का एक अच्छा असर यह भी हुआ है कि नशे की हालत में मारपीट जैसी घटनाओं में कमी आई है। भोपाल जिले के हर थाने में रोजाना औसतन 8 से 10 मारपीट के मामले दर्ज होते थे जिनकी संख्या 80 फीसदी तक घट गई है। ऐशबाग में जहां पिछले सात दिन में एक भी मारपीट का मामला दर्ज नहीं हुआ है तो एमपी नगर थाने में केवल दो और टीटीनगर थाने में छह ऐसे मामले कायम हुए हैं।
शराब की बिक्री में गिरावट
शराब ठेकेदारों का कहना है कि नोटबंदी के शुरूआती 2 दिन में काफी असर हुआ था। एक दम 30 से 35 प्रतिशत शराब की बिक्री कम हुई थी। लेकिन अब भी शराब की सेल पर 15 से 20 प्रतिशत इसका असर है। क्योंकि शराब ठेकेदारों को 500 और 1000 के नोट लेने की अनुमित नहीं दी गई है। इसके बाद भी कुछ शराब की दुकानों पर खुल्ले वापस नहीं देने की शर्त पर 500 व 1000 के नोट गिनती की एक-दो शराब की दुकानों पर द्वारा लिए जा रहे हैं।