श्योपुर जिले में संचालित आवासीय छात्रावासों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों व प्रबंधन पर भी नोटबंदी का असर पड़ने लगा है। कई छात्रावासों में अभी तक राशन को लेकर समस्या नहीं थी लेकिन लगातार चलने वाली नोटबंदी के कारण अब परेशानी आने लगी है। बाहर से पढ़ने आए वे विद्यार्थी ज्यादा परेशान हो रहे हैं, जिनके बैंक खाते उनके निवास क्षेत्र के हैं। जब वह एटीएम से पैसे निकालने पहुंच रहे हैं तो 2000 के नोट होने के कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। क्योंकि आदिम और अनुसूचित जनजाति के इन गरीब तबके के विद्यार्थियों के खातों में इतने पैसे नहीं रहते। ऐसी समस्या के चलते वह हाथ खर्चें से परेशान हो गए हैं और शिक्षण सामग्री तक नहीं खरीद पा रहे हैं। स्थिति ये आ गई है कि उनके पास खाने तक के लिए भी पैसे नहीं हैं।
यह हकीकत पॉलीटेक्निकल छात्रावास में देखी जा सकती है। जहां रहने वाले विद्यार्थियों के पास आटे और सब्जी तक के लिए पैसे नही है। थोड़े बहुत बैंक खातों में पड़े हैं पर वह उन्हें मिल नहीं पा रहे हैं। श्योपुर जिले में लगभग 70 आवासीय छात्रावास हैं जिनमें से ऐसे छात्रावास जहां छात्रों की संख्या अधिक है उनके प्रबंधन में ज्यादा परेशानी आ रही है।
शिवपुरी लिंक रोड़ स्थित 100 सीटर ओबीसी छात्रावास में लगभग 80 विद्यार्थी रह रहे हैं। जिनके लिए न छात्रावास में न तो मैस है और न ही पास में कोई कैंटीन। इस कारण उन्हें खाने पीने को लेकर ज्यादा परेशानी रहती है। इधर कॉलेज का समय सुबह 9 से दोपहर तीन बजे तक का तय है। इस कारण वह चाहकर भी खाने पीने की व्यवस्था नहीं कर पाते। लेकिन नोटबंदी ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है।
छात्रावासों में रहने वाले बच्चों के खाने पीने की सामग्री जुटाना भी मुश्किल हो रहा है। जो राशन का स्टॉक था वह खत्म हो गया है। नोटबंदी के चलते बाजार से जो राशन उधार लाया जा रहा था वह अब दुकानदारों ने भी देना बंद कर दिया है। इधर कई छात्रावासों में पिछले दो माह से पैसा नहीं निकल पाने के कारण डेली मैनेजमेंट भी गड़बड़ा गया है। नोटबंदी के कारण अभी बैंकों से इतना पैसा भी नहीं निकल पा रहा है जो 100 या 120 सीटर छात्रावासों में सात दिन की पूर्ति कर सके। स्थिति ये है कि छात्रावासों की राशि जारी नहीं होने और इधर नोट बंदी के कारण श्योपुर सहित कराहल और विजयपुर क्षेत्र के आवासीय छात्रावासों में व्यवस्था प्रबंधन गड़बड़ा गया है।