आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर आम आदमी पार्टी का जिक्र किए बिना मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार मतदाताओं को इसके असर से दूर रखने के प्रयास में है। इसके चलते सूबे में इस बार बिजली की दरें नहीं बढ़ाने का फैसला किया है। इतना ही नहीं, सरकार अगले वित्त वर्ष में बिजली की दरें कम करने का भी वादा परोसेगी। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में बिजली की दरें कई पड़ोसी राज्यों की तुलना में काफी ज्यादा हैं।
मध्यप्रदेश के ऊर्जा मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने गुरूवार को अपने नई दिल्ली प्रवास के दौरान यह संकेत दिए। उन्होंने कहा कि हाल में बिजली कंपनियों ने विद्युत नियामक आयोग में जीरो प्रतिशत वृध्दि की याचिका दायर की है। इसके चलते अप्रैल से प्रदेश में बिजली की दरें बढ़ने की संभावना नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास यह है कि आने वाले महीनों में बिजली वितरण के मोर्चे पर हो रहे नुकसान (ट्रांसमिशन लास) को कम किया जाए। अगर इसमें कामयाबी मिली तो बिजली की दरें कम हो जाएंगी।
हालांकि शुक्ला ने यह मानने से इंकार किया कि सरकार यह सारी कवायद आम आदमी पार्टी के असर को रोकने के लिए कर रही है। उन्होंने किसी पार्टी का नाम लिए बिना कहा कि सस्ती बिजली देने की बात करने वाले राजनीतिक दल तो अभी आए हैं लेकिन मध्यप्रदेश सरकार गरीबों और किसानों को सस्ती बिजली देने के लिए कई वर्षों से बिजली कंपनियों को भारी-भरकम सब्सिडी दे रही है। इस वित्तीय वर्ष में यह सब्सिडी बढ़कर तीन हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
केंद्र के रवैये से परेशान: ऊर्जा व जनसंपर्क मंत्री शुक्ला ने कहा कि वे लंबे समय से रीवा अंचल की सड़कें सुधारने के लिए गुजारिश कर रहे हैं। अब इस सिलसिले में जल्द ही वे भूतल परिवहन मंत्री ऑस्कर फर्नांडिस व शहरी विकास मंत्री कमलनाथ से मिलकर इसके लिए राशि जारी करने का आग्रह करेंगे। उन्होंने कहा कि जनसंपर्क महकमे के कामकाज में तेजी लाने के लिए वे तकनीकी के इस्तेमाल को बढ़ावा देना चाहते हैं।