राजधानी में चल रहे दूसरे रायसीना डॉयलॉग में विेदेश सचिव एस जयशंकर ने आतंकवाद को विश्व के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है। तीन दिवसीय रायसीना डॉयलॉग में उन्होंने अपने संबोधन के दौरान कहा कि मौजूदा दौर में आतंकवाद का खात्मा दुनिया के लिए बड़ी चुनौती है। इसको खत्म करना न सिर्फ मानव सुरक्षा के लिए बेहद अहम है बल्कि विश्व के विकास के लिए भी सबसे बड़ी दरकार है। 17 जनवरी से शुरू हुए इस रायसीना डॉयलॉग में 65 देशों से करीब 250 प्रतिनिधी हिस्सा ले रहे हैं।
इस दौरान दिए अपने संबोधन में जयशंकर ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि सार्क एक देश की वजह से असुरक्षित है। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों के अंदर भारत और रूस के बीच संबंध और अधिक मजबूत हुए हैं। इसकी वजह दोनों देशों का शीर्ष नेतृत्व रहा है जो लगातार हर मुद्दे पर एक दूसरे का पक्ष सुनता है और उनका सम्मान करता आया है।
रायसीना डॉयलॉग के दौरान उन्होंने अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में बेहतर संबंधों के लिहाजा भारत ट्रंप ट्रांजीशिन टीम से लगातार संपर्क में है। उन्होंंने उम्मीद जताई कि भविष्य में दोनों देशों के संबंध और अधिक मजबूत होंगे। जयशंकर ने कहा कि वर्ष 2008 से अब तक भारत ने तकनीक और व्यापार के क्षेत्र में अभूतपूर्व ढंग से निवेश किया है। इसका फायदा भी देश के विकास में देखने को मिला है।
तीन दिवसीय रायसीना डॉयलॉग का उद्घाटन मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। इस मौके पर उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान के सफर का पथ भी शांति का होना चाहिए। भारत का रुख धर्म को आतंकवाद से अलग करने तथा अच्छे एवं बुरे आतंकवाद के कृत्रिम वर्गीकरण को खारिज करने का है। लेकिन वह पाकिस्तान के साथ शांति के पथ पर अकेले आगे नहीं बढ़ सकता है।
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र द्वारा रायसीना डायलॉग के दूसरे एडिशन में दिए गए भाषण की तारीफ की है। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने बुधवार को कहा कि उन्हें सरकार की विदेश नीति के संबंध में कोई वैचारिक मतभेद नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ‘रायसीना डायलॉग’ में 65 देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं जो राष्ट्रीय परिदृश्य के हिसाब से महत्वपूर्ण है।