यूपी में चुनाव से ऐन पहले जारी सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन की उठापटक को अंतिम रूप देने के लिए प्रियंका वाड्रा ने मोर्चा संभाल लिया है। शुक्रवार को अखिलेश द्वारा जारी 191 उम्मीदवारों की लिस्ट में कांग्रेस की 9 सीटों पर उम्मीदवार घोषित होने के बाद कहा जा रहा था कि गठबंधन की कोशिशों को झटका लगा है लेकिन बाद में खबर आई की प्रियंका अब इस पूरे मामले को देख रही हैं।
प्रियंका ने एक भरोसेमंद व्यक्ति को अखिलेश से मिलने के लिए भी भेजा था। सूत्रों के अनुसार अखिलेश से मिलने के लिए एक शख्स को भेजा गया था। कांग्रेस नेताओं ने भी पूरे मामले में प्रियंका के उतरने की बात मानी लेकिन ज्यादा कुछ कहने से परहेज किया। अनिश्चितता पैदा होने के बाद कांग्रेस ने दबे स्वर में जरूर कहा कि बातचीत में खटास पड़ी है और इसके लिए अखिलेश जिम्मेदार हैं जिन्होंने अपने वादे के उलट कदम पीछे खींचे।
कांग्रेस प्रवक्ता अजय माकन के अनुसार अखिलेश यादव और कांग्रेस नेताओं ने गठबंधन तय किया था और इसे लेकर अब फिर बातचीत जारी है। एक अंग्रेजी अखबार की खबर के अनुसार पहले डील तय करने के करीब पहुंच चुके अखिलेश फिलहाल शांत नजर आ रहे हैं और यह इस बात से भी साबित होता है कि उनके मोबाइल में प्रियंका वाड्रा के 11 मैसेज थे जिनका जवाब नहीं दिया गया।
माना जा रहा है कि पार्टी में घमासान के बाद जीत से अखिलेश का आत्मविश्वास बढ़ा है और वो ज्यादा सीटें बांटने के पक्ष में नहीं हैं। यह भी कयास लगाए जा रहे हैं राहुल गांधी और अखिलेश के बीच मीटिंग असफल रही है। माना जा रहा है कि कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद शनिवार को लखनऊ पहुंच सकते हैं।
कांग्रेस के बड़े स्तर के सूत्रों के अनुसार सपा और कांग्रेस में 100 सीटों को लेकर सहमति बन गई थी लेकिन अब सपा सोच रही है कि यह संख्या बेहद ज्यादा है। अगर गठबंधन नहीं होता है तो यह कांग्रेस के लिए बड़ा झटका होगा सूत्रों का कहना है कि अखिलेश चाहते थे कि राहुल लखनऊ आएं और सपा-कांग्रेस गठबंधन की घोषणा करते हुए संयुक्त चुनाव अभियान शुरू करें लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
पूरी बातों के बीच कांग्रेस नेता राजबब्बर ने एक बयान में कहा है कि गठबंधन की चर्चा जारी है और जो लोग कह रहे हैं कि कांग्रेस सकारात्मक नहीं है वो गलत जानकारी दे रहे हैं।