गरीब बच्चों को बड़े स्कूल नहीं दे रहे प्रवेश

गरीब बच्चों को बड़े स्कूल में मुफ्त पढ़ाई करवाने में कानून ही आड़े आ गया है। अल्पसंख्यक स्कूलों को शिक्षा के अधिकार (आरटीई) से बाहर रखने के प्रावधान का फायदा उठाकर जिले के 18 स्कूलों ने गरीबों से किनारा कर लिया है। कोई खुद को मुस्लिम, कोई ईसाई तो कोई जैन होने का आधार बनाकर गरीब बच्चों को प्रवेश देने से इंकार कर रहा है। इससे करीब 1 हजार सीटों का नुकसान हो रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने आरटीई में गरीब बच्चों को 25 प्रतिशत प्रवेश देने के दायरे से अल्पसंख्यक स्कूलों को राहत दी है। कानून के संशोधन से जिले के एक चौथाई स्कूलों में प्रवेश बंद हो गए। ये स्कूल संचालक अल्पसंख्यक आयोग से प्रमाण-पत्र ले आए हैं। इन सभी बड़े स्कूलों में नर्सरी में औसतन 50 सीटें आरटीई के तहत हैं।
जानकारों का कहना है कि छूट का प्रावधान उन स्कूलों के लिए लागू होना था, जिनमें 90 प्रतिशत अल्पसंख्यक श्रेणी के बच्चे पढ़ते हैं। इसे गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है। इसका फायदा कई स्कूल उठा रहे हैं। स्कूल संचालक अपने धर्म के मुताबिक अल्पसंख्यक होने का प्रमाण-पत्र बनवा रहे हैं जबकि स्कूल में सभी संपन्ना और अलग-अलग धर्म के बच्चे पढ़ते हैं। शिक्षा अधिकारी भी प्रमाण-पत्र देख कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं और कानून के डर के आगे प्रमाण-पत्र ले रहे हैं।
– सेंट पॉल स्कूल
– सेंट रेफियल्स स्कूल
– सेंट अर्नाल्ड स्कूल (विजय नगर व लालाराम नगर)
– मारथोमा स्कूल (स्कीम 114 व न्यायनगर)
– सेंट रिसेंट क्लॉटी स्कूल
– माउंट कार्मल स्कूल
– सेंट जोसफ स्कूल (नंदा नगर व बिजलपुर)
– सन्मति हायर सेकंडरी स्कूल
– लिटिल वंडर स्कूल
– एडवांस एकेडमी
– शिशुकुंज इंटरनेशनल
– एमराल्ड हाइट्स
– आईपीएस
– विद्यासागर (कोर्ट स्टे)
– प्रज्ञा गर्ल्स स्कूल (कोर्ट स्टे)
(शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के मुताबिक)
शहरी में 12, पंचायत में 5
स्कूल संचालकों ने अल्पसंख्यक का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया है तो उन स्कूलों में आरटीई के प्रवेश बंद कर दिए गए हैं। शहरी क्षेत्र के 12 और पंचायत क्षेत्र के 4 स्कूल हैं। दो स्कूलों को स्टे मिला है। जिन स्कूलों ने प्रवेश देने से मना किया है, उनमें ही प्रवेश के लिए रुचि ज्यादा है। यह हमें भी स्पष्ट नहीं है कि स्कूल संचालक का अल्पसंख्यक होना जरूरी है या विद्यार्थियों का।
इस वर्ष आरटीई के तहत कुल 18 हजार सीटें हैं जिनमें से एक हजार सीटें अल्पसंख्यकों के प्रावधान के कारण कम हो गईं। गरीब एवं वंचित वर्ग के परिवार के बच्चों की भी दिलचस्पी सिर्फ सीबीएसई स्कूलों में प्रवेश लेने की है। पहले चरण में करीब 5 हजार बच्चों के प्रवेश हुए हैं, शेष सीटें खाली हैं। अब तक दूसरे चरण के बारे में कोई निर्देश नहीं दिए गए हैं।

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