रांस के फोटोग्राफर अलबर्ट कान्ह एक अरबपति बैंकर थे। उन्होंने लुमियर बंधुओं द्वारा आविष्कार की गई कलर फोटोग्राफी में महारत हासिल कर ली थी। वे बेहतरीन तस्वीरों की खोज में देशाटन करने लगे।
ऐसी ही एक यात्रा के दौरान वे मंगोलिया पहुंचे। मंगोलिया के एक गांव के बाहर उन्होंने देखा कि एक महिला को लकड़ी के एक तंग बॉक्स में कैद करके रखा गया है। बक्सा सुनसान इलाके में रखा है और उसमें बस एक छेद है, जिसके जरिए वह महिला बाहर रखे प्यालों में पानी और खाना ले सके।
महिला राहगीरों से खाना और पानी मांगती और जितना मिल जाता, उसी से गुजारा करती। यह धीमी और भूख से तड़पाने वाली सजा थी। मंगोलिया सहित पूर्व के कुछ देशों में तब इस तरह की सजा के प्रावधान थे। अलबर्ट ने महिला के फोटो तो लिए, लेकिन उसकी मदद नहीं कर पाए।
उन्हें डर था कि कहीं वे मंगोलिया का कानून न तोड़ दें। जुलाई 1913 में लिया गया ये फोटो जब पश्चिमी जगत में छपा, तो लोगों को यकीन नहीं हुआ कि दुनिया में ऐसी धीमी, असहनीय और तिल-तिल कर मारने वाली सजा भी दी जाती है। 1922 में विश्व प्रसिद्ध पत्रिका नेशनल जियोग्राफिक ने इस फोटो को ‘बक्से में कैद मंगोलियन” कैप्शन से प्रकाशित किया था।