गोबर के कंडों से होलिका दहन करने की नईदुनिया की पहल की अब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी सराहना की है। नईदुनिया को खत लिखकर उन्होंने कहा है कि लकड़ियों से होलिका दहन पर्यावरण संकट को बढ़ाता है। इस संकट से बचने के लिए गोबर के कंडों की होली एक सार्थक पहल है। कंड़ों से होली जलाने से गौमाता का भी सम्मान बढ़ेगा और गोशालाओं को अतिरिक्त आय का साधन भी मिल सकेगा।
प्रतिष्ठित समाचार पत्र नईदुनिया में आज आओ जलाएं कंडों की होली की पहल का समाचार पढ़कर अत्यंत हर्ष हुआ। यह पहल अत्यंत ही प्रशंसनीय है। आज समूचा विश्व ग्लोबल वार्मिंग जैसी पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसी चुनौतियों के बीच में हमारा यह दायित्व है कि हम अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए अपनी धरा को सुरक्षित रखने के सभी प्रयास करें।
इस जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए किसी के भी द्वारा उठाए गए इस तरह के कदम का मैं स्वागत एवं समर्थन करता हूं। भविष्य की पीढ़ियों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए ही मेरे द्वारा मां नर्मदा के संरक्षण के लिए समाज के हर वर्ग के संकल्प और समर्थन से नर्मदा सेवा यात्रा प्रारंभ की गई है। मुझे इस बात की प्रसन्न्ता है कि इस यात्रा को समाज के सभी वर्ग के लोगों का सहयोग एवं समर्थन मिल रहा है। मैं इस समर्थन से अभिभूत हूं।
भारतीय संस्कृति में होलिका दहन की पंरपरा बहुत पुरानी है। प्राचीन समय में जब आबादी कम थी, जंगल घने थे और समाज के लोगों में जंगलों में गिरी हुई सूखी लकड़ियों को बीन कर होलिका दहन किया जाता था, उस समय पर्यावरण की चुनौती हमारे सामने नहीं थी। आज जब जंगलों में वृक्षों की संख्या में बहुत कमी आई है और बढ़ती आबादी के कारण हरे-भरे वनों को काटा जा रहा है, ऐसी स्थिति में लकड़ियों से होलिका दहन हमारे पर्यावरण संकट को बढ़ाता है। इस संकट से बचने के लिए गोबर के कंडों की होली एक सार्थक पहल है।
गोबर के कंड़ों से होली जलाने से हमारी गौमाता का भी सम्मान बढ़ेगा और देश में समाज के द्वारा संचालित अनेकों गोशालाओं को एक अतिरिक्त आय का साधन भी मिल सकेगा। इसके द्वारा गोशालाओं की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होने से हम गोवंश के संवर्धन का पुण्य कार्य भी कर सकेंगे।
पर्यावरण की रक्षा के लिए मैं सदैव ऐसे प्रयासों का समर्थक रहूंगा। इस अभिनव और अनुकरणीय अभियान के लिए मैं नईदुनिया को बधाई एवं शुभकामनाएं देता हूं।