ट्रंप की सरकार बनने और उनके आदेशों के बाद विदेशी आवेदकों की संख्‍या में जबरदस्‍त गिरावट

अमेरिका में डोनाल्‍ड ट्रंप की सरकार बनने और उनके द्वारा दिए गए आदेशों के बाद वहां के विभिन्‍न विश्वविद्यालयों में पढ़ने की इच्‍छा रखने वाले विदेशी आवेदकों की संख्‍या में जबरदस्‍त गिरावट देखने को मिली है। देश के दस सबसे बड़े विश्वविद्यालयों में इसका सीधा असर देखने को मिला है। यहां 27,000 छात्रों में सिर्फ 1900 अंतरराष्ट्रीय छात्र हैं।
अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ कलिजिएट रजिस्ट्रार्स के मुताबिक, विभिन्न कॉलेजों में विदेशी छात्रों द्वारा किए जाने वाले आवेदन में करीब 40 प्रतिशत की गिरावट आई है। सबसे कम आवेदन इस बार पश्चिम एशिया के स्टूडेंट्स की तरफ से मिला है। अधिकारियों के मुताबिक ट्रंप द्वारा ट्रेवल बैन की घोषणा के बाद यहां पर आने वाले छात्रों के मन में चिंता के भाव आने लग गए हैं। यही वजह है कि छात्र इस बार यहां पर आकर पढ़ाई करने से कतरा रहे हैं।
एक अंग्रेजी अखबार की खबर के मुताबिक पिछले दिनों ट्रंप के आदेशों को लेकर हवाई के जज ने भी साफतौर पर कहा था कि इन प्रतिबंधों का असर देश के यूनिवर्सिटी सिस्टम पर भी देखने को मिलेगा और देश को आर्थिक हानि झेलनी पड़ेगी। ग्रेजुएशन के लिए यहां आने वाले छात्रों की संख्‍या में ट्रंप के आदेश के बाद करीब 50 फीसद तक गिरावट दर्ज की गई है। इससे उन विषयों को लेकर चिंता बढ़ गई है जो सिर्फ अंतरराष्ट्रीय छात्रों को पढ़ाए जाते हैं।
अंतरराष्ट्रीय छात्र अमेरिका की अर्थव्यवस्था में हर साल 32 अरब डॉलर का योगदान देते हैं। गत दशक में अंतरराष्ट्रीय छातोरं की आवक देश में बढ़ी थी और पिछले साल ही यह आंकड़ा एक 10 लाख को पार कर गया था।
न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया और नॉर्थ-ईस्टर्न यूनिवर्सिटी का कहना है कि उनके यहां विदेशी छात्रों की संख्या ज्यादा रही है। इधर, पोर्टलैंड स्टेट यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष विम विवेल ने कहा कि पिछले सप्ताह हैदराबाद के 10 संभावित स्टूडेंट्स से उन्होंने मुलाकात की, लेकिन काउंसलिंग सेशन के दौरान अमेरिका में रहने को लेकर उनके अंदर डर दिखाई दिया। एक मुस्लिम छात्र ने कहा कि उसके पिता अमेरिका और इसके मुस्लिम विरोधी रवैये को लेकर डरे हुए हैं।
ओहायो यूनिवर्सिटी में आवेदकों की संख्या में 8.4 फीसदी की गिरावट आई है। आवेदकों में चीनी छात्रों की संख्या सबसे कम पाई गई है जो कि ट्रंप इफेक्ट को समर्थन नहीं देते। वहीं कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की फ्रांसिस लेसली की चिंता अब यह है कि आवेदकों में से कितने स्टूडेंट वास्तव में ऐडमिशन लेंगे, क्योंकि कई यूनिवर्सिटी की डेडलाइन तब खत्म हुई थी जब ट्रंप का ट्रैवल बैन ऑर्डर नहीं आया था।
ओरेगन यूनिवर्सिटी में इस साल बेहद कम अंतरराष्ट्रीय स्टूडेंट्स ने आवेदन दिया है। विवेल हालांकि, यह भी कहते हैं कि नई दिल्ली और बेंगलुरु के स्टूडेंट्स की चिंता पढ़ाई में आने वाला खर्च है जो कि नोटबंदी का सीधा असर है। वहीं, काउंसल ऑफ ग्रैजुएट स्कूल की अध्यक्ष सुसेन ओर्टेगा कहती हैं कि इसके लिए अन्य आर्थिक वजह जैसे सऊदी अरब में कच्चे तेलों की कीमत का कम होना और एच-1बी वीजा को लेकर अमेरिकी अनिश्चितता भी है

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